जागरण संवाददाता, हिसार : नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू करने के ठीक बाद ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने एक नया फरमान जारी किया है, जिसके तहत ड्राइविग लाइसेंस बनवाने वालों को अब रेडक्रॉस में फ‌र्स्ट एड की ट्रेनिग लेनी होगी। अचानक से जारी इस फरमान ने रेडक्रॉस में लोगों को लाभ देने के स्थान पर परेशान करने का काम किया है। नया एक्ट लागू हुआ तो ड्राइविग लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या बढ़ गई, ऐसे में 360 से अधिक लोग हर दिन लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, मगर इससे पहले उन्हें रेडक्रॉस से फ‌र्स्ट एड का सर्टिफिकेट लेना होगा, जिसके लिए हिसार में लोगों की लंबी लाइनें लग रही हैं। इससे बुरी स्थिति तो यह है कि रेडक्रॉस में इन आवेदकों को जमीन पर बैठाकर क्लास दी जा रही है। पुरुष तो जैसे तैसे स्थिति झेल रहे हैं, मगर अधिक दिक्कत तो महिलाओं व लड़कियों को हो रही है। आवेदकों की संख्या इतनी अधिक है कि रेडक्रॉस में एक बड़ा हॉल भरने के बावजूद गेट और गैलरी तक में लोगों को बैठाया जा रहा है।

-----------------

शौचालय पर ताला, महिलाओं को हो रही दिक्कत

डिपार्टमेंट का नियम है कि डीएल के आवेदकों को एक दिवसीय प्रशिक्षण रेडक्रॉस में लेना होगा। अब एक दिन लगाने के लिए कई लोग शहर के दूर के क्षेत्रों से भी आ रहे हैं, जिसमें महिलाएं व लड़कियां भी शामिल हैं। ऐसे में उनके लिए रेडक्रॉस में शौचालय तक की बुनियादी व्यवस्था नहीं है। लोगों ने बताया कि एक शौचालय है तो वहां किसी कर्मचारी ने ताला लगा रखा है। सोमवार को लोगों को परेशानी हुई तो उन्होंने विरोध कर ताला खुलवाया, जब भीतर टॉयलेट का हाल देखा तो वह चौक गए। स्वच्छता का नारा देने वालों के यहां ही शौचालय में काफी गंदगी थी। इसके साथ ही पानी की एक टंकी लगी है। वहां भी लोगों की शिकायत थी कि उस टंकी के पानी को भी कई दिनों से साफ तक नहीं किया गया है।

-------------

पार्किंग को लेकर भी लोग परेशान

यहां लोगों को सबसे अधिक दिक्कत पार्किंग से है। लोगों का कहना है कि अगर वह कोई जानकारी लेने भी रेडक्रॉस में आ रहे हैं तो जबरन उन पर दबाव बनाया जाता है कि वह वाहन खड़ा करके पार्किंग पर्ची कटवाएं। अगर कोई व्यक्ति दो मिनट के लिए भी आता है तो उसे पार्किंग फीस देने को मजबूर होना पड़ रहा है। सिर्फ यही नहीं बल्कि रेडक्रॉस में सोमवार को अनावश्यक घंटों पानी बहता हुआ दिखाई दिया, परिसर में पशुओं का जमावड़ा था। गौरतलब है कि पहले आम दिनों में 70 डीएल बनाए जाते रहे हैं, मगर एक्ट लागू होने के बाद इसकी संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप