बहादुरगढ़, जेएनएन। औद्योगिक क्षेत्र की कूलर फैक्टरी में लगी आग छठे दिन भी पूरी तरह से नहीं बुझ पाई है। इस बीच पुलिस और दमकल टीम ने फैक्टरी का कुछ हिस्सा सर्च किया। वहां पर राख के ढेर के अलावा और कुछ नहीं मिला। भूतल और बेसमेंट के अंदर अभी भी आग जल रही है। दूसरी ओर इस फैक्टरी में काम करने वाले तीन लोगों के लापता होने की खबर है। उनके परिचित फैक्टरी के गेट पर उनकी तलाश में पहुंचे, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि घटना के वक्त तीनों इसी फैक्टरी में फंसे रह गए थे या नहीं। इनमें से एक तो महिला है। पुलिस ने इनके बारे में कोई सूचना न होने की बात कही है।

20 सितंबर की शाम को इस फैक्टरी में आग लगी थी। मंगलवार को भी बेसमेंट और भूतल पर आग जल रही थी। बताते हैं कि फैक्टरी के अंदर 200 टन प्लास्टिक दाना भरा हुआ था। 20 हजार से ज्यादा कूलर की मोटर थी। भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ, प्लास्टिक का सामान और कार्टून रखे हुए थे। इसी कारण आग इतनी भयंकर हुई कि उसमें लोहे के भारी भरकम गार्डर तक मोल्ड हो गए। फैक्टरी किराये पर चल रही थी।

तीन लापता लोगों की सूचना नहीं

फैक्टरी के अंदर से दो शव तो अगले दिन मिल गए थे, लेकिन अभी तक तीन और लोगों के बारे में जानने के लिए उनके परिचित फैक्टरी के गेट पर पहुंच चुके थे। दो युवक तो अपने साथी के बारे में पूछने पहुंचे थे। उन्होंने नाम नहीं बताया मगर यह कहा कि वह इसी फैक्टरी में काम करता था और घटना के बाद से वह नहीं मिला है। एक महिला कर्मी के बारे में भी अन्य महिला ने पूछा। उसने बताया कि वे दोनों घर से साथ ही आती थी। उसकी सहेली तो इस कूलर फैक्टरी में काम करती थी जबकि उसकी फैक्टरी आगे है। वहीं एक अन्य युवक ने आकर उप्र के हरदोई के रहने वाले आलोक के बारे में पूछा। उसने बताया कि उसी ने आलोक को इस फैक्टरी में लगवाया था। हालांकि पुलिस का कहना है कि उसके पास किसी ने आकर इसी तरह की सूचना नहीं दी है।

पुलिस और दकमल टीम ने किया कुछ हिस्सा सर्च

मंगलवार को पुलिस और दमकल विभाग की टीम ने कुछ हिस्सा सर्च किया। उसमें राख के ढेर के अलावा कुछ नहीं मिला। अधजली हालत में एक मोबाइल मिला। पुलिस का कहना है कि यह मोबाइल मरने वाले दो लोगों में से एक का था। जहां पर अभी आग और धुआं है, वह हिस्सा पूरी तरह सर्च नहीं हो सका। ऐसे में जब आग पूरी तरह बुझ जाएगी, उसके बाद ही फैक्टरी अच्छी तरह सर्च होगी। भगवान न करे कोई और कर्मचारी अंदर फंसा रह गया हो, मगर चर्चा यह भी है कि यदि कोई और फंसा रह गया तो इतनी भयंकर आग में उसका नामोंनिशान तक मिलना मुश्किल है।

दो ने कूदकर बचाई जान, कई पहलुओं को छिपाता रहा प्रबधन

फैक्टरी के अंदर आग से बचाव और सुरक्षा के प्रबंधों पर तो लापरवाही बरती ही गई थी, लेकिन घटना के दौरान और उसके बाद प्रबंधन की तरफ से न केवल गलती हुई, बल्कि कई पहलुओं को छिपाता भी रहा। बताते हैं कि जब आग लगी तो दो कर्मियों ने छत के रास्ते पड़ोस की फैक्टरी में कूदकर जान बचाई थी। इनमें एक का सोनू और दूसरे का गोल्डी नाम बताया जा रहा है। दोनों को चोट भी लगी, लेकिन उनके बारे में किसी को नहीं बताया गया। फैक्टरी के अंदर तीन गाड़ी थी। उनको निकालने की जल्दी दिखाई लेकिन कर्मचारियों की जान की परवाह नहीं की। जब शार्ट सर्किट हुआ और आग लगी तो बिजली का मेन स्विच बंद कर दिया गया। इससे पूरी फैक्टरी में अंधेरा हो गया। जो कर्मचारी अंदर फंसे थे, उन्हें कुछ पता ही नहीं चल पाया। यहां तक की इस घटना में मौत का शिकार हुए क्वालिटी मैनेजर दीपक ठाकुर की पत्नी देर रात जब पहुंची तो फैक्टरी प्रबंधन के एक सदस्य ने यहां तक कह दिया था कि दीपक तो यहां काम नहीं करता।

..फैक्टरी का जो हिस्सा सर्च किया गया है, वहां कुछ नहीं मिला है। किसी और के लापता होने के बारे में अभी कोई सूचना नहीं मिली है। घटना को लेकर दर्ज केस में कार्रवाई की जा रही है।

--पवनवीर, एमआइई पुलिस चौकी प्रभारी।

Posted By: Manoj Kumar

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