जेएनएन, हिसार। वित्त एवं राजस्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि देश के किसी विश्वविद्यालय द्वारा ऐसा कोर्स नहीं चलाया जाता जिसमें मकान निर्माण की विभिन्न विधाओं में कारीगर तैयार किए जाते हों, लेकिन हरियाणा की सभी आईटीआई में इसका कोर्स शुरू किया जाएगा जिसमें ईंट-पत्थर, लकड़ी, लोहा-सरिया, पलंबर, टाइल-पत्थर व पेंट करने जैसे सभी कार्यों के हुनरमंद तैयार किए जाएंगे। वित्तमंत्री गांव बडाला में पांचाल समिति द्वारा आयोजित विश्वकर्मा दिवस समारोह में बतौर मुख्यातिथि ग्रामीण जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

    वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने ग्रामीणों को दीपावली, गोवर्धन दिवस व विश्वकर्मा जयंती की बधाई देते हुए प्रदेशवासियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि 70 साल के आजाद भारत में हमारी परंपरागत कौशल कला व हुनर को विकसित करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। हिंदुस्तान में हजारों साल पहले बने विश्व विख्यात मंदिर, दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल, सोने की लंका, सरदार पटेल की हाल ही में बनी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा हमारे कारीगरों की कल्पना शक्ति व कला के अद्भुत नमूने हैं। लेकिन देश के ऐसे परंपरागत कौशल को विकसित करने व इनकी विधिवत् शिक्षा की ओर कोई किसी पूर्ववर्ती सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

हमारी परांपरागत विधाओं को किसी संस्थान में आधुनिक परिप्रेक्ष्य से नहीं पढ़ाया जाता। लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं के कौशल विकास हेतु पलवल में भगवान विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय का निर्माण करवाया जा रहा है जहां हमारे पारंपरिक हुनर को तराशने का कार्य किया जाएगा। सरकार ने निश्चय किया है कि भगवान विश्वकर्मा द्वारा प्रदान किए गए कौशल को खत्म नहीं होने देंगे।

वित्तमंत्री ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि भगवान इंद्र की नगरी स्वर्ग और सृष्टि का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया। भगवान विश्वकर्मा हम सबके प्रेरणा स्रोत हैं। भगवान ने हम सभी को काम करने के लिए दो हाथ दिए हैं जिनके माध्यम से हम देश, समाज व स्वयं के भविष्य का निर्माण करते हैं। जिनके पास काम करने वाले दो हाथ हैं, वे सब भगवान के समान हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पूज्य पिताजी ने हमें भी बचपन में ही ऐसे संस्कार दिए थे कि जीवन में चाहे जितना धन आ जाए लेकिन हम सबको अपने हाथ से काम करने की कला जरूर सीखनी चाहिए।

 वित्तमंत्री ने पांचाल समाज की मांग पर विश्वकर्मा भवन के निर्माण हेतु 11 लाख रुपये देने की घोषणा करते हुए ग्रामीणों से आह्वान किया कि इस भवन के लिए गांव के हर घर, हर जाति और हर धर्म से सहयोग लेकर इसमें सर्वसमाज की हिस्सेदारी की जाए। उन्होंने कहा कि इस भवन का उपयोग महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई के कोर्स करवाने, प्रोढों के लिए शिक्षा केंद्र, वाचनालय-पुस्तकालय व महिलाओं के लिए बैठकर गीत-भजन जैसी गतिविधियों के लिए भी किया जाए ताकि यह सर्व समाज की सच्ची व उपयोगी धरोहर साबित हो सके।

   

उन्होंने बताया कि गांव के लिए पेयजल परियोजना का शीघ्र निर्माण करवाया जाएगा। अगले 3-4 महीने के भीतर ग्रामीणों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इसी प्रकार गांव के लिए 2.5 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजना मंजूर हो चुकी है, इसके लिए धनराशि भी जारी की जा चुकी है लेकिन भाटोल के गतिरोध के चलते यह परियोजना शुरू नहीं हो पा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे भाटोल के लोगों से संपर्क कर इस गतिरोध को दूर करवाएं, वे स्वयं भी भाटोल के ग्रामीणों से इसके लिए अनुरोध करेंगे।

    कैप्टन अभिमन्यु ने ग्रामीणों से कहा कि मेरा सपना है कि ग्रामीण 24 घंटे बिजली लें। इसके लिए मुझे आपका साथ चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की म्हारा गांव-जगमग गांव योजना के तहत राज्य के 2800 गांवों को 24 घंटे बिजली दी जा रही है। इसके कारण उन गांवों में अब लडक़ों के रिश्ते भी होने लगे हैं, क्योंकि बिजली मिलने के साथ ही कई प्रकार की सुविधाएं और रोजगार भी बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के बकाया बिलों के निपटान के लिए सरकार ने बहुत महत्वपूर्ण योजना शुरू की है जिसके तहत 100 रुपये के बकाया बिल केवल 2 से 3 रुपये जमा करवाकर निपटाए जा रहे हैं। इसके साथ ही 1 अक्तूबर से बिजली के रेट लगभग आधे कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामीण अपने बकाया बिलों का समाधान करवा ले और लाइन लोस कम करके 24 घंटे बिजली लें। जब 24 घंटे और सस्ती बिजली मिलेगी तो किसी को बिजली चोरी करने की जरूरत ही नहीं रहेगी।

 

Posted By: manoj kumar