जेएनएन, हिसार। ऑनलाइन सामान बेचने वाली नॉमी कंपनियों से सामान लेकर एक अलग तरह का खेल रच एक गिरोह कंपनियों को लाखों रुपयों की चपत लगा रहा है। यह गिरोह हरियाणा ही नहीं राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली सहित 22 राज्यों में चल रहा था। इसमें लोगों को सामान बेचने और कंपनियों को चूना लगाने के लिए 11 हजार लोग 52 वाट्सएप से जुड़े थे। इसमें राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के कर्णपुरा गांव निवासी कालूराम को मध्य प्रदेश के इंदौर पुलिस ने गिरफ्तार किया हुआ है। उसने काफी चौकाने वाले खुलासे किए।

कालूराम ने हिसार के आदमपुर में भी अभिषेक नामक युवक को 3950 मोबाइल सिम बेचे थे। अब हिसार पुलिस यह तलाश कर रही है कि यह सिम किस की आइडी पर इतने खरीदे गए। इंदौर पुलिस के अनुसार कालूराम अपने आप को ओटीपी की दुनिया का बेताज बादशाह कहता था। उसने आधार लिंक सिमकार्ड खरीद कर बेचे थे। यह गिरोह असम, उड़ीसा सहित कई राज्यों से फर्जी आइडी की सिम थोक में खरीदकर डिमांड के अनुसार सप्लाई करता था। फर्जी सिम बेचने पर एडवांस राशि कमिश्न के रूप में वालेट में प्राप्त करता था।

अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए उसने 22 राज्यों के लोगों को 52 ग्रुप में जोड़ा। 11 हजार लोगों को जोड़ कर वह अपने धंधे को बढ़ा रहा था। इसमें हरियाणा के अलावा मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि कई राज्यों में गिरोह के तार जुड़े है। वहीं वाट्स पर बनाए गए ग्रुप में सात ग्रुपों एडमिन मध्य प्रदेश के है। गिरोह के सदस्य फोन-पे, पेटीएम, पेजैप, अमेजन, फिल्पकार्ट, स्विगी आदि के ओटीपी उपलब्ध कराने व बेचने का दावा करते थे।

ऐसे चलता था गिरोह
अमेजन और फिल्पकार्ट से कालूराम सहित गिरोह के बाकी सदस्य सामान मंगवाते थे। वह कंपनी को बाद में सामान नहीं मिलने की शिकायत दर्ज करवाते और पैसे वापस करने की मांग करते। इस पर वह इन कंपनियों को हर माह 25 लाख रुपये तक का चूना लगा रहे थे। इसमें मुख्य रूप से फोन या बड़े प्रोडक्ट होते थे जिसमें बचत जाती होती थी। वह सामान को बाद में सस्ते दामों पर बेच देते थे।

हाइक वॉल्ट से कमाए 80 हजार रुपये
सिम में आने वाले ओटीपी के माध्यम से गिरोह के सदस्यों को लाखों रुपये कमाए है। इसमें हाइक वॉल्ट के प्रोमोशनल कोड से 80 हजार रुपये तक एकत्रित कर लिए थे। अब कालूराम से पूछताछ करने पर पता चलेगा कि वह कहां से सिम लाया था और सिम लेते समय किस-किस की आइडी यूज की थी। या सिम चोरीशुदा हैं।

एएसआइ कृष्ण कुमार ने बताया कि आदमपुर के मुख्य बाजार में अभिषेक नामक युवक बड़े स्तर पर विभिन्न कंपनियों के मोबाइल सिम अवैध रूप से लाकर बेचता है। जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है और जनता को नकली सिम बेचकर अवैध धंधा कर रहा है। आदमपुर के गांधी नगर निवासी अभिषेक को मंगलवार को आइडिया कंपनी के 1150, एयरटेल के 800, बीएसएनएल के 500 और वोडाफोन के 1500 सिम बरामद के साथ पकड़ा था। वह सिम संबंधी कोई कागजात नहीं दे सका।

अभिषेक बोला- आनलाइन शॉपिंग पर छूट के लिए जुटाए सिम
पुलिस पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसने कर्णपुरा के कालूराम से प्रति सिम 30 रुपये में खरीदे थे। वह प्रति सिम मुनाफा लेकर आइडी लेकर उनको आगे बेच देता था। उसकी मानें तो आनलाइन प्रोडक्ट पर निश्चित समय के लिए मिलने वाली छूट पर वह और सर्कल के दोस्त शॉपिंग करते थे। कई कंपनियां एक सिम पर एक बार ही छूट देती हैं।

कार्डिंग तकनीक से डाटा चुरा कर रहे ऑनलाइन शॉपिंग
ठगी गिरोह के सदस्य फर्जी सिम का ही नहीं बिजनेस कर रहे थे। बल्कि वह इन सिम का प्रयोग ऑनलाइन ठगी में भी करते थे। वह कार्डिंग तकनीक से डाटा चुरा कर उससे ऑनलाइन शॉपिंग करते थे। वह क्रेडिट और डेबिट काड्र का डाटा चुराते थे। गिरोह के सदस्यों ने लाखों लोगों को इससे चूना लगाया। वहीं गिरोह की तरफ से बनाए गए ग्रुप में डेबिट कार्ड का भी सौदा किया जाता था। पुलिस की जांच में सामने आया कि चालू एटीएम डेबिट कार्ड के सौदे से इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड होता था। ग्रुप में इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड गिरोह भी सस्ते दामों पर डेबिट कार्ड उपलब्ध करवा रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया कि देश और विदेश के डाटाबेस भी यह उपलब्ध करवाते और बेचते थे। इसमें ट्रूकॉलर का डाटा बेचने की बात सामने आई है।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस