रोहतक, जेएनएन। किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए फसल विविधिकरण को अपना सकते हैं। कृषि विविधिकरण एक से अधिक या मिश्रित फसल प्रणालियों का परिचायक है। बागवानी, मत्स्य, वन सम्पदा, मुर्गी पालन और अन्य गैर क्षेत्रों जैसे अन्य संबंधित उद्योगों में एकमात्र कृषि गतिविधियों में बदलाव से छोटे किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए यह फायदेमंद व्यवसाय कर सकते हैं।

फिलहाल देश और प्रदेश में उच्च मूल्य की फसलों की मांग काफी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक उत्कृष्ट विकल्प है। कृषि विविधिकरण में बागवानी एक बहुत ही उत्कृष्ट विकल्प है, जो सीधे तौर पर किसान की आमदनी बढ़ाता है। इसके तहत बागवानी विभाग किसानों की बागवानी फसलों से संबंधित छोटे उद्योग स्थापित करने में तकनीकी मदद के अलावा अनुदान भी प्रदान करता है। बागवानी फसलों जैसे बाग, सब्जी, फूल, खुंभी, शहद, सुंगधित पौधे, रेशम आदि से संबंधित छोटे उद्योगों जैसे जैम, जैली, मुरब्बा, चटनी, अचार, खुम्भी, शहद, रैश्म उत्पादन की छोटी यूनिट लगाने में विभाग ने किसानों को मदद दी जाती है।

छोटी औद्योगिक इकाई भी लगा सकेंगे किसान

इसके साथ-साथ बढ़े स्तर की यूनिट जैसे खुंभी उत्पादन की वातानुकूलित यूनिट, कोल्ड स्टोर, फल पकाने का चैंबर, प्याज भंडारण ग्रह आदि के लिए भी तकनीकी मद्द एवं अनुदान प्रदान किया जाता है। किसान बागवानी अपनाकर अपनी आमदनी को लगभग चार गुणा तक बढ़ा सकते है। बागवानी विभाग ने किसानों को नए बागों की स्थापना, सब्जी की कास्त, खुंभी की खेती, मधु मक्खी पालन के क्षेत्र विस्तार के लिए सहायता प्रदान करता है। योजना आधारित खेती जैसे उच्च स्तरीय खेती अब मुख्य रूप से किसान छोटी औद्योगिक ईकाईयां लगा सकते है। संरक्षित खेती जैसे नेट हाऊस, पोली हाउस, ला टनल, वाकईन टनल, मल्चिंग आदि संरक्षित ढांचों में उच्च गुणवत्ता की खेती जैसे खीरा, टमाटर, रंगीन शिमला मिर्च, चैरी टमाटर आदि की खेती को बढ़ावा देकर अपनी आमदनी बढ़ाई जा सकती है।

 

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप