हिसार, जागरण संवाददाता। हिसार के गांव स्याहड़वा में तीसरे दिन भी मंगलवार को सुबह से एनडीआरएफ के जवान जयपाल को खोजने की कोशिश में कुएं की खोदाई करते रहे। मगर रेतीली भूमि और पानी दोनों ने मिलकर दलदल जैसी स्थिति पैदा कर दी। इस कारण से शव को खोजना भी एनडीआरएफ के लिए चुनौती बन गया। दिनभर खोदाई और खोदाई की रणनीति बार-बार बदलने के बाद रात्रि आठ बजे जयपाल का शव एनडीआरएफ को मिल गया। मगर शव और भी नीचे धंस सकता था इस कारण से उसे निकालने में सावधानी बरती जा रही थी।

रेतीली मिट्टी होने के कारण दो बार सेना और एनडीआरएफ को बदलनी पड़ी रणनीति

रात्रि 10 बजे तक की शव को कुंए से बाहर निकालने में सफलता नहीं मिली और रेस्क्यू आपरेशन जारी रहा। क्योंकि अधिक देर तक जमीन में रहने के कारण शव डीकंपोज होना शुरू हो गया था। जिससे बदबू आ रही थी। गौरतलब है कि रविवार को सुबह सात बजे स्याहड़वा निवासी जयपाल और जगदीश फौजी कुएं में मोटर सही करते समय कुएं की जमीन धसकने से तल की मिट्टी में समा गए थे। इसके बाद सेना की इंजीनियरिंग रेजीमेंट व एनडीआरएफ के जवान मिलकर यहां रेस्क्यू आपरेशन चला रहे हैं। इसके बाद सोमवार सुबह जगदीश के शव को निकाल लिया गया। मगर जयपाल को खोजने के लिए लगातार खोदाई जारी रही। मंगलवार को दिनभर चली खोदाई के बाद आखिरकार टीम शव तक पहुंचने में कामयाब हुई।

20 मिनट ही एक जवान कुएं में रह सकता है

इस रेस्क्यू आपरेशन में जटिल बात यह थी कि यहां रेतली भूमि थी। जिसमें एक बार तो सोमवार को एनडीआरएफ का जवान भी फंस गया था। हालांकि बमुश्किल उसे बाहर निकाला गया। इस कुएं में एक जवान कम से कम 20 मिनट तक ही खोदाई कर सकता था। इसके बाद दूसरा जवान भेजा जाता। क्योंकि कुएं में सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इस रेस्क्यू में एनडीआरएफ की दो यूनिट के सभी जवान लगातार काम करते दिखाई दिए।

सुराग मिले तो टीम ने ली राहत की सांस

अभी तक तीन दिनों से चल रही खोदाई में कुछ पता नहीं चल पा रहा था कि जयपाल कहां है। मगर शाम छह बजे सबसे पहले कुएं में उसकी कस्सी, पानी व अन्य सामान दिखे तो टीम को आभास हो गया कि अब कुछ और देर खोदाई करनी पड़ेगी। इसके बाद और नीचे गए तो बाल्टी मिली जिसमें चाबी, नट्ट, एक कट्टा मिला। वह नीचे मोटर के पंखे के नट खोल रहे थे। इसके इस्तेमाल के लिए बाल्टी और यह सामान लेकर गए हुए थे।

Edited By: Naveen Dalal