विदेशों में छाए बाजरा के बिस्किट, अमेरिका-इंग्लैंड से आ रहे ऑर्डर; हरियाणा के किसान की हो रही मोटी कमाई
नारनौंद के किसान राजपाल श्योरान ने प्राकृतिक खेती से बाजरे के बिस्कुट बनाकर देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है।
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प्राकृतिक खेती से बाजरे के बिस्कुट बनाकर राजपाल श्योरान ने विदेशों में मचाई धूम।
HighLights
किसान राजपाल श्योरान ने प्राकृतिक खेती से बनाए बाजरे के बिस्कुट
उनके बिस्कुट अमेरिका, इंग्लैंड सहित कई देशों में हो रहे निर्यात
यह सफलता अन्य किसानों को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही
संवाद सहयोगी, नारनौंद। अगर जिंदगी में कोई मकसद तय किया हो तो कोई भी रुकावट उसको रोक नहीं सकती। गांव कोथ कलां के किसान राजपाल श्योरान ने मन में दृढ़ निश्चय किया कि वह अलग से काम करके देश-विदेश में पहचान बनाने का काम करेंगे।
इसके लिए उन्होंने प्राकृतिक खेती को चुना और फिर इस खेती की फसल बाजरे के प्रोडक्ट बनाकर देश-विदेश में बेचने की शुरुआत कर डाली। आज उनके बनाए हुए बाजरे के बिस्कुट देश ही नहीं विदेशों में भी बड़े चाव से खाए जाते हैं।
किसान मेले से मिली थी प्रेरणा
आज प्रदेश के किसान प्राकृतिक खेती को छोड़कर फसलों में कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग करके लोगों के स्वास्थ्य को बिगड़ने का काम कर रहे हैं। किसान राजपाल श्योरान ने सोचा कि वह प्राकृतिक खेती को अपनाकर अन्य लोगों को भी खेती करने के लिए जागरूक करेंगे।
उन्होंने 10 साल पहले ही इसकी शुरुआत की और खेत में जो फसल होती है उसको बाजार के भाव से कई गुना ज्यादा के भाव पर बेचने का काम करते हैं। फसल तैयार होने से पहले ही देश के अलग-अलग कोनों के लोग ऑनलाइन ही बुकिंग कर देते हैं। 2017 में दिल्ली में किसान मेला लगा हुआ था, उसमें देखा कि बाजरे के बिस्कुट बनाकर बेचे जा रहे हैं।
वहीं, से प्रेरणा ली कि वह अपने खेत में ही बाजरे की फसल तैयार करके शुद्ध तरीके से बिस्कुट बनाने का काम करेंगे और गांव में आते ही इसकी तैयारी शुरू कर दी।
अमेरिका, इंग्लैंड और श्रीलंका से आते हैं ऑर्डर
उन्होंने बाजरे के बिस्कुट बनाने में रागी, मक्की, अजवाइन, तिल, हल्दी और देसी खांड का प्रयोग करके हेल्दी बिस्किट तैयार करके उनको बेचना शुरू कर दिया। शुरुआत में कामयाबी कम मिली लेकिन धीरे-धीरे ऐसी पहचान बनी कि उनके द्वारा बनाए हुए बिस्किट इंग्लैंड, अमेरिका, नेपाल, मोरक्को, श्रीलंका सहित देश के अलग-अलग कोनों में ऑनलाइन आर्डर से मंगवाए जाते हैं।
किसान राजपाल श्योरान ने बताया कि अगर कोई भी काम शिद्दत से किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। कभी सोचा नहीं था कि दो एकड़ का किसान अपनी फसल में खुद के बने हुए प्रोडक्ट को विदेश में बेचने का काम करेगा लेकिन सपना सच हुआ और आज राखीगढ़ी महोत्सव में भी हमारे बिस्कुटों को विशेष पहचान मिली है।
देशभर से आए पर्यटकों के काफी ऑर्डर मिले हैं। अन्य किसान भी खेती के साथ-साथ इससे जुड़े हुए कार्यों को अपनाकर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं। किसान किसी का मोहताज नहीं है, उसके हाथ में हुनर है। वह अपने हुनर को पहचाने।
