रिश्वत प्रकरण::::

-अदालत ने कहा- सुरेश चौधरी पर लगे आरोप गंभीर, नहीं दे सकते जमानत

जागरण संवाददाता, हिसार : रिश्वत प्रकरण में विजिलेंस के हत्थे चढ़े आरोपित ड्रग कंट्रोल अधिकारी सुरेश चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका को वीरवार को जिला सत्र एवं न्यायाधीश अरुण कुमार सिघल की अदालत ने खारिज कर दिया है। सुरेश चौधरी ने 9 अक्टूबर को कोर्ट में याचिका लगाई थी। अदालत की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सुरेश चौधरी पर लगे आरोप गंभीर हैं, इसलिए उसे जमानत नहीं मिल सकती। अभियोजन पक्ष के सरकारी अधिवक्ता भारत भूषण दहिया ने मांग की है कि अभी आरोपी का वायस सैंपल व पूछताछ होनी बाकी है। इसलिए इसे जमानत न दी जाए। जिस पर अदालत ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी।

वहीं चपरासी रामपाल व गाड़ी चालक सुमित का रिमांड खत्म होने पर वीरवार को दोनों को अदालत में पेश किया गया। दोनों को जांच अधिकारी द्वारा जिला सत्र एवं न्यायाधीश अरुण कुमार सिघल की अदालत में पेश की गई चालान की कापी सौंपी गई। रामपाल के अधिवक्ता जेएस मल्ही व सुमित के अधिवक्ता कुलदीप बेडवाल की स्टेटमेंट रिकार्ड की गई। मामले को 28 अक्टूबर को सुनवाई के लिए रख दिया गया है। जिसमें आरोप निर्धारण के लिए विचार होगा और जेल अधिकारी को आरोपी रामपाल व सुमित को पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में शिकायतकर्ता रामबिलास के अधिवक्ता रहे रमेश यादव ने बताया कि जांच एजेंसी द्वारा जांच में जो कमियां छोड़ी गई हैं, उनको शिकायतकर्ता द्वारा अदालत में चैलेंज करने की जरूरत है। जिससे आरोप निर्धारित करते समय व हाइकोर्ट के पास जमानत के समय केस मजबूत रहे व मामले में सभी आरोपी जांच एजेंसी द्वारा छोड़ी गई कमियों का फायदा न उठा सकें। क्योंकि आरोप निर्धारण की स्टेज गंभीर स्टेज होती है। इससे पूरे केस की दिशा पलट सकती है।

उल्लेखनीय है कि सुरेश चौधरी के खिलाफ विज्ञापन जारी करने के लिए सिरसा विजिलेंस की ओर से एसीजेएम नीरू कंबोज की अदालत में लगाई गई याचिका को अदालत ने बुधवार को खारिज कर दिया था। मामले में जांचकर्ता सिरसा विजिलेंस में इंस्पेक्टर अनिल सोढी का कहना है कि वह अब जिला सत्र एवं न्यायाधीश अरुण कुमार सिघल की अदालत में याचिका लगाएंगे। सुरेश चौधरी के खिलाफ विज्ञापन जारी करने की याचिका मंजूर होती है तो उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जा सकता है।

Edited By: Jagran