जागरण संवाददाता, हिसार : नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू हो गया है। शहर का 251 साल पुराना श्रीदेवीभवन मंदिर है। जिसमें श्रद्धालु सुबह साढ़े 5 बजे माता की पूजा-अर्चना कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन ने कोविड-19 के चलते मंदिर में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किया है। बिना मास्क के श्रद्धालुओं को माता के मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही मंदिर सुबह साढ़े पांच बजे से रात आठ बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इस दौरान माता के मंदिर में एक बार में पांच श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाएगी। उनके आने के बाद पांच श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही मंदिर में बार शारीरिक दूरी रखते हुए लाइन में श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।

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प्रतिदिन 10 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद

श्रीदेवी भवन मंदिर के महासचिव विपिन गोयल ने बताया कि उन्हें नवरात्र में प्रतिदिन करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में उनकी इस अनुमानित संख्या के अनुसार ही मंदिर में पूजा अर्चना के लिए व्यवस्थाएं की गई है। मंदिर में कोविड-19 में सुरक्षा के मद्देनजर सेनिटाइज के लिए ऑटोमैटिक मशीन लगवाई गई है। मास्क के बाद ही मंदिर में श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति प्रदान की जाएगी। जो श्रद्धालु मास्क नहीं लेकर आएंगे उन्हें मंदिर प्रशासन की ओर से निशुल्क मास्क वितरित किए जाएंगे।

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13 से 21 अप्रैल तक चलेगा नवरात्र पर्व

श्रीदेवी भवन मंदिर के पंडित सुरेश ने बताया कि नवरात्र पर्व 13 अप्रैल से 21 अप्रैल तक चलेगा। मां के नौ रुपों की उपासना के ये नौ दिन काफी महत्वपूर्ण माने जाते है। नवरात्र में सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें मां भक्ति से प्रसन्न होकर पूरी करती हैं। इसके अलावा नवरात्र में नौ दिन व्रत रखना धार्मिक ²ष्टि से तो शुभ है साथ ही स्वास्थ्य की ²ष्टि से भी नवरात्र में व्रत रखना लाभदायक है।

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श्री देवी भवन मंदिर का ये है इतिहास

श्री देवी भवन मंदिर की स्थापना 1770 में पटियाला के महाराजा ने की। मंदिर के महासचिव विपिन गोयल कहा मंदिर में 18 देवी देवताओं के मंदिर बनाए हुए है। 13 अप्रैल 1988 को मंदिर परिसर में गोशाला की स्थापना की गई थी। मंदिर परिसर में माता के नौ रुप की प्रतिमा के साथ-साथ, हनुमान मंदिर, भगवान गणेश, श्रीराम दरबार, राधा-कृष्ण मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, भैरवनाथ मंदिर, मां संतोषी माता मंदिर, तिरूपति बालाजी मंदिर है। वर्तमान में मंदिर में 7 पुजारी नियमित पूजा अर्चना करते हैं।

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