जेएनएन, हिसार : पिछले चार से पांच दिनों से जिले में मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है। बुधवार को हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया तो वहीं सुबह और शाम के वक्त गर्मी न के बराबर रही। मगर दिन में सूरज की तपिश अब भी लोगों की त्वचा जला रही है। धूप के साथ उमस के चलते भी दिन के वक्त गर्मी का मौसम बना रहता है। ऐसे में अब आगामी तीन से चार दिनों तक परिवर्तनशील मौसम का मिजाज देखने को मिलेगा। वहीं ज्यादा बारिश होने से फसलों को भी नुकसान हो सकता है। मगर जिन इलाकों में पानी की कमी रहती है उन जगहों पर फसलों के लिए अभी भी पानी की दरकार है। वहीं जिले में बुधवार को अलसुबह करीब ढाई बजे जबरदस्त बारिश हुई। इस बारिश से जहां कई जगहों पर फसलों को नुकसान हुआ है वहीं शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। दिल्ली रोड पर एक बार फिर पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को 15 एमएम बारिश हुई। वहीं पेड़-पौधों से घिरी एचएयू में 29 एमएम बारिश दर्ज की गई है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह जाता हुआ मानसून है, जो आमतौर पर नुकसान ही करता है। इस बारिश के साथ चली हवाओं से जहां कपास-नरमा का फल गिर गया है। वहीं कई जगहों पर धान की फसल को भी नुकसान हुआ है। सभी तरह की फसल अपनी पकाव अवस्था में है। कपास-नरमा की अगेती फसलों पर फल आ गया था। वहीं मूंग की फसल भी पकने पर है। ऐसे में कई जगहों पर हवाओं के साथ आई बारिश ने नुकसान किया है। चौधरी चरण ¨सह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार 16 सितंबर तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। लेकिन बीच-बीच में बादल और कहीं कहीं छिटपुट बूंदाबांदी या हल्की बारिश की संभावना है। उत्तर भारत में ये रहेगा मौसम -

वैज्ञानिकों के अनुसार मॉनसून की अक्षीय रेखा हिमालय के तराई इलाकों के करीब चल रही है और एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान पर बना है। इस तरह से जम्मू कश्मीर में बारिश की तीव्रता में मामूली वृद्धि की उम्मीद है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश होगी। उत्तर पंजाब और उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में भी वर्षा की उम्मीद है, जबकि दिल्ली, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में मौसम आमतौर पर शुष्क रहेगा। एचएयू में 29.2 एमएम और बाकि शहर में 15.2 एमएम -

पेड़-पौधों का पर्यावरण को नियंत्रित करने में कितना प्रभाव होता है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार को हुई शहर के उस क्षेत्र में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई, जहां पेड़-पौधों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत अधिक है। चौधरी चरण ¨सह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में 29.2 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि आइएमडी द्वारा बाकि शहर में 15.2 एमएम बारिश दर्ज की गई है। विश्वविद्यालय में अधिक बारिश को लेकर यह भी कहा जा सकता है कि मानसून में कहीं अधिक तो कहीं कम बारिश होती है। लेकिन एचएयू में पेड़ पौधों की अधिकता के कारण हमेशा बारिश बाकि जगहों की अपेक्षा अधिक होती है।

Posted By: Jagran