गांव अखाड़े से अमेरिका तक धाक जमाएंगी हरियाणा की दो चचेरी बहनें, विश्व चैंपियनशिप का टिकट पक्का
हांसी की उमरा गांव की चचेरी बहनें प्रवीण मलिक (50 किग्रा) और स्वीटी मलिक (53 किग्रा) ने अंडर-23 महिला विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई है।

अखाड़े से अमेरिका तक धाक जमाएंगी उमरा की दो चचेरी बहनें, विश्व चैंपियनशिप का टिकट पक्का।
HighLights
प्रवीण और स्वीटी मलिक ने विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया
दोनों चचेरी बहनें अमेरिका में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी
उमरा के खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना
जागरण संवाददाता, हांसी। उमरा के अखाड़े में कुश्ती के दांव-पेंच सीखने वाली दो चचेरी बहनें अब अमेरिका में भारत की चुनौती पेश करेंगी। इंदिरा गांधी स्टेडियम में अंडर-23 महिला विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए हुए ट्रायल में एशियन स्पोर्ट्स स्कूल की प्रवीण मलिक और स्वीटी मलिक ने अपने-अपने भार वर्ग में पहला स्थान हासिल कर भारतीय टीम में जगह पक्की की।
प्रवीण ने 50 किलोग्राम और स्वीटी ने 53 किलोग्राम भार वर्ग में पहला स्थान पाया। आगामी अक्टूबर में अमेरिका में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में दोनों भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। वहीं स्कूल की काजल ढाका ने 55 किलोग्राम भार वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया।
कोच संजय मलिक के अनुसार विश्व चैंपियनशिप में भारत की ओर से कुल 10 महिला पहलवान उतरेंगी और इनमें दो पहलवान एक ही गांव उमरा की चचेरी बहनें हैं। दोनों इससे पहले भी एशियाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक हासिल कर चुकी हैं।
भारतीय टीम की 10 पहलवानों में दो उमरा की बेटियां
कोच संजय मलिक ने बताया कि अंडर-23 महिला विश्व चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में कुल 10 पहलवानों का चयन हुआ है। इनमें प्रवीण और स्वीटी का एक ही गांव और एक ही परिवार से होना क्षेत्र के लिए विशेष उपलब्धि है। ट्रायल के बाद दोनों ने कोच ओमप्रकाश मलिक के साथ खुशी साझा की।
11 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में उतर चुके पहलवान
एशियन स्पोर्ट्स स्कूल प्रबंधन के अनुसार वर्ष 2026 में यहां के पहलवान अब तक 11 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेकर पदक हासिल कर चुके हैं। लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के कारण स्कूल के पहलवान कुश्ती में अपनी पहचान बना रहे हैं।
पानी की समस्या से जूझ रहे उमरा के खिलाड़ी
खिलाड़ियों की उपलब्धियों के बीच स्कूल में बुनियादी सुविधा की कमी का मुद्दा भी सामने आया है। कोच संजय मलिक का कहना है कि पीने के पानी की समस्या के समाधान के लिए करीब डेढ़ साल से अधिकारियों के चक्कर लगाए जा रहे हैं।
कई बार समस्या अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी करने वाले पहलवानों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
