-अभी से प्रशासन की ओर से गांव में भेजी जा रही यूरिया की खेप

संवाद सहयोगी, हांसी : डीएपी के बाद अब किसानों को यूरिया की चिता सताने लगी है। डीएपी के लिए अभी भी बाजार में स्टाक नहीं है। हालांकि अब पहले से स्थिति बेहतर है, परंतु डीएपी लेने के लिए किसानों द्वारा कड़ा संघर्ष किया गया था। लोग डीएपी के लिए अल-सुबह ही लाइनों में खड़े हो जाते थे। जैसे-तैसे किसानों को डीएपी उपलब्ध हो गया, परंतु अब वे यूरिया को लेकर चितित है। हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को यूरिया की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। ये तो समय ही बताएगा। अभी से विभाग की ओर से गांव में बनाए गए मिनी बैंक व सेल प्वाइंटों पर अभी से यूरिया भेजना शुरू कर दिया है। ताकि किसानों को यूरिया के लिए शहर में आने की जरूरत न पड़े। मंगलवार को सातरोड़ में यूरिया का रैंक उतरा है। इस रैंक में करीबन 52 हजार 200 बैग यूरिया आए हैं। इस रैक में से भिवानी जिले में 5 हजार बैग भेज गए हैं, बाकि बैग हिसार जिले में भेजे गए हैं।

हांसी सब डिविजन की बात की जाए तो पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार 93 हजार 350 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंहूं, करीब 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों, 1182 हेक्टेयर में चना, 560 हेक्टेयर में जो, 5700 एकड़ में चारा फसल बोई गई थी। इन्हीं आकड़ों के अनुसार अबकि बार हांसी सब डिविजन में करीब 7 से 8 लाख यूरिया के बैग की जरूरत है। कृषि विभाग के अनुसार एक एकड़ गेंहूं में 2 बैग यूरिया प्रयोग किया जाता है तो वहीं सरसों की फसल में 1 बैग यूरिया प्रयाप्त है। अभी पूरे क्षेत्र में गेंहूं की बिजाई चल रही है। बिजाई के करीब 3 सप्ताह बाद पहली बार गेहूं की फसल में पानी देते समय यूरिया डाला जाता है। यानी अभी भी विभाग के पास यूरिया के प्रबंध के लिए काफी समय है। जानकारी के अनुसार आने वाले समय में यूरिया के रैंक लगते रहेंगे और किसानों को समय पर यूरिया दे दिया जाएगा।

Edited By: Jagran