जागरण संवाददाता, हिसार : नहाय-खाए के साथ आज से छठ पर्व की शुरुआत होगी। छठ पर्व को लेकर पूर्वाचल के लोगों में उत्साह बना हुआ है। घाटों की साफ-सफाई से लेकर पूरी व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में पूर्वांचल समितियों ने निरीक्षण किया और तैयारियों को लेकर रूपरेखा बनाई। घाटों की साफ-सफाई से लेकर पानी भरने की व्यवस्था समितियों की ओर से की गई है। घाटों की सीमित संख्या और श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने से इस बार व्यवस्था उसी के अनुसार बनाई जा रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने समितियों और प्रशासन दोनों की ¨चता बढ़ा दी है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमर कस ली है। उधर, ओपी ¨जदल स्कूल के पास जय श्याम विहार स्थित सूर्यदेव मंदिर में छठ पूजा समारोह मनाया जाएगा। इस दौरान 13 नवंबर को रात 9 बजे से 14 नवंबर को सुबह 7 बजे तक विशाल जागरण किया जाएगा। इस में पूर्व मंत्री सावित्रि ¨जदल मुख्यातिथि के तौर पर शामिल होंगी। छठ पर्व आज से चार दिन तक लगातार चलेगा। इस दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। साल में दो बार इस त्योहार को मनाया जाता है। यह त्योहार पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल-प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। ---इस प्रकार चलेगा छठ पर्व - 11 नवंबर : नहाय-खाए के साथ पर्व की शुरुआत होगी। सुबह उठने के साथ ही सबसे पहले घर की साफ-सफाई की जाती है। इसके बाद व्रत रखने वाले भोजन करते हैं। घर में व्रती के भोजन के बाद ही बाकि घर के लोग भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में चने की दाल, कद्दू और चावल ग्रहण किया जाता है। - 12 नवंबर- खरने के साथ दूसरे दिन की शुरुआत होती है। कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रतधारी पूरा दिन उपवास रखते हैं। इसे खरना कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए आस-पास के लोगों को निमंत्रण किया जाता है। प्रसाद के रूप के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल, खीर, चावल का पिट्ठा और घी से चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं जाता। - 13 नवंबर : तीसरे दिन संध्या अ‌र्घ्य दिया जाता है। इस दिन छठ का प्रशास बनाया जाता है। प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। इसके अलावा चढ़ावे के रूप में लाया गया सांचा और फल भी छठ प्रसाद में शामिल किया जाता है। शाम को पूरी तैयारी और व्यवस्था के बांस की टोकरी में अ‌र्घ्य का सामान सजाया जाता है। इस दौरान व्रती के साथ पूरा परिवार व पड़ोस के लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य देने घाट की ओर चल पड़ते हैं। सभी छठ का व्रत रखने वाले एक साथ घाट पर एकत्रित होकर सामूहिक रूप से सूर्य को अ‌र्घ्य देते हैं और छठ मैया की पूजा करते हैं। 14 नवंबर : चौथे दिन उदियमान सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाता है। अगले दिन सुबह व्रती उसी जगह पर एकत्रित होते हैं जहां पहले दिन पूजा की जाती है। इस दौरान वैसे ही पूजा की जाती है जैसे तीसरे दिन शाम को भगवान सूर्य की जाती है। अंत में कच्चे दूध का शरबत पीकर और थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत खोला जाता है। ---इन जगहों पर बनाए गए हैं घाट

- मिल गेट के ¨जदल पार्क

- गुर्जर धर्मशाला के सामने राजगढ़ रोड

- तोशाम रोड़ पुल

- कैमरी रोड़ पुल

- ओपीजेएमएस स्कूल के रोड पर स्थित नहर पर

- सेक्टर 16-17 में विश्वासपुरम के सामने ---हमारी तरफ से पूरी तैयारी कर ली गई है। रविवार से घाटों में पानी भरने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस बार घाट पर पहले से अधिक भीड़ उमड़ेगी। इसे देखते हुए पूरी व्यवस्था हमारी ओर से की जा रही है।

- बल बहादुर, प्रधान, छठ पूजा समारोह

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