जागरण संवाददाता, हिसार। अब हिसार में घर बनाना महंगा कार्य होगा। क्योंकि ईंट भट्ठा मालिकों ने अब ईंट के रेटों को बढ़ाने की घोषणा की दी है। अभी तक 5300 रुपये प्रति हजार ईंट के हिसाब से रेट चल रहे थे मगर अब 6500 रुपये प्रति हजार ईंट के हिसाब से ईंट बाजार में मिलेगी। यानि एक साथ भट्ठा मालिकों ने 1200 रुपये प्रति हजार का इजाफा किया है। संचालकों का रेट बढ़ाने के पीछे तर्क है कि कोयला के रेट और मजदूरी में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसलिए अब वह पुराने दामों में भट्ठा संचालित नहीं कर सकते हैं। इसको लेकर सोमवार को हिसार जिग जग भट्ठा एसोसिएशन की वार्षिक बैठक भी जिला प्रधान दलबीर पंवार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कोयले के बढ़ते भाव, मजदूरी के बढ़ते रेट, डीजल के बढ़े हुए भाव व जीएसटी की बढ़ोतरी के चलते भट्ठा उद्योगों पर गहराए आर्थिक संकट पर विस्तार से चर्चा की गई।

कोयले के रेट नौ हजार से बढ़कर 22 हजार रुपये प्रतिटन हुए

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ईंटों के रेट अब 6500 रूपए प्रति हजार किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि कोयले के भाव पिछले छह महीनों में नौ हजार रूपए प्रति टन से बढ़कर 22 हजार रूपए प्रति टन हो गए हैं। इसके साथ ही मजदूरी भी करीब डेढ़ गुणा तक बढ़ गई है। इस स्थिति में भट्ठा उद्योग चलाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो गया है। उन्होंने कहा कि भट्ठे चलाने का नया सीजन शुरू होने जा रहा है और अगर 22 हजार रूपए प्रति टन कोयला खरीद कर भट्ठे चलाए जाते हैं तो ईंटों का रेट लगभग आठ हजार रूपए प्रति हजार हो जाएगा।

सरकार पर लगाया आरोप

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छोटे व सीमांत व्यापार को खत्म करके पूंजीपतियों के हाथों में यह व्यापार देने की साजिश रच रही है। कोयले का व्यापार पहले ही दो तीन बड़ी कंपनियों के हाथों में जा चुका है। उन्होंने कहा कि अगर ईंट भट्ठे बंद हो गए तो देश में करोड़ों मजदूर व लाखों भट्ठा व्यवसायी बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने मांग की कि भट्ठों को कोयले की आपूर्ति का रेशनेलाइजन किया जाए ताकि आम उपभोक्ता को सस्ती दरों पर ईंटें मिल सके। इस मौके पर वरिष्ठ उपप्रधान श्यामलाल, उपप्रधान सुनील यादव, महासचिव राजेश गोयत, कोषाध्यक्ष दिनेश चहल, पूर्व जिला प्रधान केसी शर्मा, सूरजमल मलिक, रघुवीर चहल, अमित आदि उपस्थित रहे।

Edited By: Rajesh Kumar