झज्जर [अमित पोपली] सर्दी का मौसम आते ही बगैर पासपोर्ट पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों का आगमन शुरू हो गया है। सदियों से चले आ रहे सिलसिले की इस दफा खासियत यह भी है कि भिंडावास क्षेत्र तक सीमित रहने वाले विदेशी मेहमानों का दायरा अब बढऩे लगा है। इन साइबेरियन पक्षियों के कलरव से झज्जर की भिंडावास झील और उसके आसपास के गांव का क्षेत्र गूंज रहा है। हालांकि उत्तरी अमेरिका से रेड नेक्ड फेलारोप का नाता पहली दफा झज्जर से जुड़ा है। साथ ही मंगोलिया, पूर्वी चाइना सहित अन्य देशों के पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां यहां आ चुकी है। ये खूबसूरत मेहमान हजारों किलोमीटर की दूरी को तय कर बसेरे की तलाश में यहां पहुंचे हैं। गर्मी की शुरुआत के साथ ही ये पुन: अपने वतन लौट जाते हैं।

 साइबेरियन पक्षियों के चार से पांच माह का यह प्रवास काल मौसम सहित माहौल को काफी खुशनुमा बनाता है। इसे कुछ यूं भी कहा जा सकता है कि झज्जर की धरा पर इन दिनों देशी-विदेशी परिंदों का मनमोहक संसार आ बसा है। पक्षियों के साथ ही यहां पक्षी प्रेमियों का आगमन भी शुरू हो गया है।

ये प्रजातिया पहुंची

इस बार भिंडावास क्षेत्र में  मुख्य रूप से डनलिन, रेडशैंक, वुड सैंडपाइपर, मार्श सैंडपाइपर, प्रेंटिनकोल, ब्लैक विंगड गोटविट, रिंग प्लोवर, केंटिस प्लोवर, स्टिंट, ग्रीन शैंक, यूरेशियन कल्र्यू आदि पक्षियों की प्रजातियां पहुंची हैं। भोजन की तलाश में जुटने वाले इन पक्षियों के प्रवास का दायरा भिंडावास क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए डीघल, गोच्छी, धौड़, प्लांट एरिया, गोरिया, नीलाहेड़ी, बेरी, मदाना आदि क्षेत्रों की रौनक बढ़ा रहे हैं।

सूर्य की दिशा और तारों की स्थिति की लेते है मदद

डीएफओ सुंदर सांभरिया के मुताबिक ये प्रवासी पक्षी यात्रा शुरू करते समय सूर्य की दिशा व तारों की स्थिति की मदद लेते हैं। किस दिशा में जाना है, इसके लिए ये परिंदे पर्वत, नदी, वन, झील आदि की भी सहायता लेते हैं। किस वक्त इन्हें यात्रा शुरू करनी है, इसका भी इन्हें पता होता है। इसी कारण अपने देशों में बर्फ जमने से पूर्व ये पर्याप्त वसा को अपने शरीर में जमा कर लेते हैं और फिर उड़ान भरते हैं।

सांभरिया का कहना है कि ठीक उस समय भी यह अपने शरीर में पर्याप्त वसा को जमा कर लेते हैं जो कि हजारों किलोमीटर की उड़ान में उन्हें सहायता करती है। प्रवास के दौरान ये पक्षी उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर उड़ान भरते हैं और अपनी ऊर्जा की बचत के लिए अंग्रेजी के 'वी आकार में उड़ते हैं। रेड नेक्ड फेलारोप सहित अन्य कई प्रजातियां भी यहां देखी गईं हैं।

Posted By: manoj kumar

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