जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ : इस बार मौसम भी किसानों के सब्र की रह-रहकर परीक्षा ले रहा है। पहले तो अत्यधिक बरसात के कारण बड़े रकबे में फसल खराब हो गई। अब वहां पर जलजमाव है। शेष हिस्से में जो फसल बची, उस पर अब मौसम की मार पड़ गई है। मौसम विभाग का अनुमान स्टीक रहा। रविवार की अल सुबह से ही मौसम करवट ले गया। तेज हवा के बीच रह-रहकर हल्की बारिश हो रही है। शाम तक कृषि विभाग की ओर से 2.4 एमएम बारिश दर्ज की गई। इससे किसानाें का संकट बढ़ गया है।

किसानों का कहना है कि जिस रकबे में धान की फसल जलभराव से बच गई, वहां पर अब बीमारी का प्रकोप भी है। इससे बचाव के लिए स्प्रे किया जा रहा है। क्योंकि धान में अब बालियां निकली रही हैं। यहां पर इसकी कटाई नवंबर में होगी। दूसरी ओर गेहूं की बिजाई का समय नजदीक आ गया है। अगले महीने से बिजाई होनी है। सरसों का रकबा तो इस बार न के बराबर होगा। मगर बड़े हिस्से में गेहूं की बिजाई पर भी संकट के बादल है।

जहां पर भारी मात्रा में जलभराव है, वहां पर बिजाई हो पाएगी या नहीं, इसी चिंता में किसान डूबे हुए हैं। जलभराव से प्रभावित किसानों का कहना है कि एक तो अत्यधिक बरसात के कारण खरीफ की फसल चौपट हो गई। वहीं रबी फसल की बिजाई हो पाएगी या नहीं, यह कह पाना मुश्किल है। इधर, मौसम में अनिश्चितता बनी हुई है। लंबे अर्से के बाद आधा अक्टूबर बीतने पर मौसम इस तरह बिगड़ा है।

किसानों का कहना है कि सरकार को मदद करनी चाहिए। उधर, कृषि विभाग के अधिकारी डा. देवराज ओहलाण ने बताया कि बारिश अभी ज्यादा नहीं हुई है। मगर इसके साथ-साथ जो तेज हवा चल रही है, इससे धान की खड़ी फसल में लाजिंग हो रही है। वह खेतों में बिछ रही है।

Edited By: Manoj Kumar