सिरसा, जेएनएन। केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर डाक्टरों के खिलाफ लगातार बढ़ रही अराजक गतिविधियों के विरोध में सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार सुबह निजी अस्पतालों ने ओपीडी बंद रखी। चिकित्सकों ने सुबहआठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी बंद रखने का निर्णय लिया। जिसके चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को वापस लौटना पड़ा। हालांकि इस दौरान एमरजेंसी सेवाएं जारी रही। आइएमए पदाधिकारियों ने हड़ताल के संबंध में उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा था।

आइएमए की जिला प्रधान डा. अर्चना अग्रवाल, उपप्रधान डा. आशीष खुराना सचिव डा. गोल्डी गुप्ता ने बताया कि पिछले तीन दिनों 15 से लेकर 17 जून तक आइएमए से जुड़े चिकित्सकों ने सुबह आठ से दस बजे तक दो घंटे ओपीडी बंद रखी थी। उसके बाद शुक्रवार को दोपहर दो बजे तक ओपीडी बंद रखने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से लगातार चिकित्सकों के साथ अप्रिय घटनाएं हो रही हैं। लोगों की जान बचाने वाले चिकित्सकों के साथ मारपीट व हाथापाई होना आम बात हो गई है। चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं है। संगठन पदाधिकारियों ने एक स्वर में मांग की कि चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए सरकार ठोस कानून बनाए, ताकि वे बेहतर तरीके से लोगों की सेवा कर सकें।

चिकित्सकों ने कहा कि दूसरी ओर बाबा रामदेव द्वारा एलोपैथी चिकित्सा के प्रति लगातार अर्नगल बयानबाजी कर रहा है, जोकि सहन करने योग्य नहीं है। उनकी सरकार से मांग है कि डाक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक कानून बनाया जाए, ताकि डॉक्टर अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकें। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान एलोपैथी पद्धति से ही लाखों लोगों की जानें बचाई गई हैं। जबकि बाबा रामदेव कह रहे हैं कि एलोपैथी चिकित्सा के कारण लाखों लोगों की मौत हुई है। रामदेव की एलोपैथी के प्रति की जा रही बयानबाजी को लेकर चिकित्सकों में काफी रोष है।

Edited By: Manoj Kumar