जागरण संवाददाता, रोहतक

बरसात आते ही कई विभागों के इंतजामों की कलई खुल गई है। हालात यह हैं कि बिजली निगम का पुलिस लाइन के निकट आकाशवाणी केंद्र की जमीन पर बिजली निगम के सब डिवीजन नंबर-1 का कंट्रोल रूम संचालित है। आकाशवाणी संबंधित जमीन को खाली कराने की कोशिश में है, जबकि बिजली निगम के अधिकारी संबंधित इमारत पर काम कराना नहीं चाहते। नियमित तौर से यहां 20 से लेकर सीजन में 100 तक उपभोक्ता पहुंचते हैं। यहां जेई, लाइनमैन के साथ ही 16 कर्मचारी भी तैनात हैं। शौचालय से लेकर यहां पानी तक का इंतजाम नहीं।

एचएसईबी वर्कर्स यूनियन सिटी प्रधान विजय हुड्डा का दावा है कि शहरी क्षेत्र में शिकायत केंद्र बेहद कम बचे हैं। जो भी शिकायत बचे हैं वहां कभी भी हादसा हो सकता है। मौत के साए में रहकर कर्मचारी काम करते हैं। हालात यह हैं कि मानसरोवर पार्क के निकट शिकायत केंद्र और बिल जमा कराने का केंद्र है। यहां इमारत जर्जर हो चुकी है। कोई सुनवाई नहीं। अधिकारी बैठ भी नहीं सकते। बिजली निगम ने हिसार रोड औद्योगिक क्षेत्र के लिए चौथा सब डिवीजन तो बना दिया, लेकिन सुविधाएं नहीं दी। भिवानी रोड स्थित पालिका कालोनी के निकट बने बूस्टिग स्टेशन में सामान रखना पड़ रहा है। यहां खिड़की और दरवाजे भी नहीं। इस कारण सामान भी चोरी हो जाता है। झज्जर रोड के सामने यानी शांतमई चौक के निकट भी जर्जर इमारत में केंद्र संचालित है। इसी तरह से पुरानी आइटीआइ के निकट सब डिवीजन नंबर-2 की इमारतें भी जर्जर हैं। अधिकारियों को कोई सुनने वाला नहीं। इन सभी सब डिवीजन और शिकायत केंद्रों पर रोजाना सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। रिमोट से संचालित करने दो पावर हाउस पर हुआ था ट्रायल

शहरी क्षेत्र में आफिसर कालोनी और बाल भवन के निकट रिमोट से संचालित करने के लिए प्रोजेक्ट तैयार हुआ था। सूत्रों का कहना है कि योजना पर अमल को लेकर बाधाएं सामने आईं। इसलिए प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। इसलिए अनमेंड पावर हाउस पर मैनुअली काम शुरू कराना शुरू किया गया। हालांकि आफिसर कालोनी में मैनुअली काम कराने के लिए इमारत तैयार करा दी गई। लेकिन बाल भवन के निकट इमारत नहीं बनाई। यहां एक कमरा चौकीदार के लिए बनाया गया था उसमें कंट्रोल पैनल और 11केवी कंट्रोल पैनल को भी लगा दिया। इस कारण इसमें कोई बैठ भी नहीं सकता है। बिजली निगम की अनदेखी से भी परेशानियां हो रहीं हैं। वर्जन

जिस इमारत का जिक्र हो रहा है वह आकाशवाणी की जमीन है। वर्षों पहले आकाशवाणी ने बिजली की परेशानियों से बचने के लिए अपने क्वार्टर की जमीन दी थी। यहां अब शिकायत केंद्र संचालित है। आकाशवाणी चाहता है कि बिजली निगम जमीन खाली कर दे। लेकिन हमें लिखित में शिकायत देंगे तो हम स्पष्ट तौर से थोड़ी ही दूरी पर हमारी एक इमारत है वहां इस केंद्र को शिफ्ट कर देंगे।

मेहताब सिंह, एक्सईएन, बिजली निगम

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बाल भवन के निकट शिकायत केंद्र के कर्मचारियों के लिए बैठने की कोई जगह नहीं है। कर्मचारी आकाशवाणी केंद्र के साथ लगते जिस कमरे में बैठते हैं वह जर्जर हालात में है। शौचालय और पानी तक का यहां इंतजाम नहीं है। आकाशवाणी केंद्र वाले उसे खाली करवाना चाहते हैं और बार-बार इस बारे में बिजली विभाग के अधिकारियों से पत्राचार भी कर रहे हैं। इसलिए उसकी कोई मरम्मत न आकाशवाणी और न ही बिजली विभाग करवा रहा है। कर्मचारी अधिकारियों से बार-बार कमरे की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक किसी अधिकारी इस मामले में कोई संज्ञान नहीं ले रहे।

विजय हुड्डा, प्रधान सिटी यूनिट, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन

Edited By: Jagran