वैभव शर्मा, हिसार

सिरसा रोड स्थित कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (टीटीसी केंद्र) में नौवें कृषि दर्शन किसान मेले का शुभारंभ हुआ। इसमें यह सामने आया कि हरियाणा व आसपास के राज्यों में आइसक्रीम का व्यवसाय करने वाले उद्योगों और किसानों को जल्द ही मीठा सीताफल एक नया रोजगार मुहैया कराने वाला है। दरअसल छत्तीसगढ़ की वीएनआर नर्सरी ने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के जंगली सीताफल पर प्रयोग कर सीताफल की एक नई प्रजाति विकसित की गई है। यह सीताफल 24 ब्रिक्स मीठा होने के साथ ही कम से कम बीज और अधिक से अधिक पल्प वाला होगा। अभी तक भारतीय प्रजाति में बीज अधिक होते हैं और पल्प काफी कम। यह नई प्रजाति आइसक्रीम का उद्योग करने वालों को काफी पसंद आएगी, क्योंकि आइसक्रीम को बनाने के लिए अधिक पल्प की जरूरत होती है। इसके साथ ही महाराष्ट्र के कोंकण एग्री विद्यापीठ ने बिना बीज वाले नींबू की पौध तैयार की है। यह पौध वर्षभर नींबू प्रदान करेगी। इन दोनों ही नई प्रजातियां विभिन्न राज्यों के किसानों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहीं। मेले में इन राज्यों से आए किसान कृषि मेले में 160 स्टॉलों पर देश के कई राज्यों से 7,345 किसानों ने दिनभर कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों की जानकारी भी ली। इसमें विशेषत: हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, तमिलनाडू, केरल, गुजरात, छत्तीसगढ़, व उत्तर प्रदेश से किसानों ने भाग लिया। सीताफल का एक पेड़ तीन साल में होता है तैयार सीताफल की नई प्रजाति के फल का वजन 300 से 900 ग्राम तक है, फलों का आकर्षक रंग होता है, फल का 65 प्रतिशत हिस्सा खाने योग्य होता है, मीठे सीताफल का एक पेड़ तीन वर्ष में तैयार होकर 40 किलोग्राम तक फल देता है। एक पौधा प्रतिदिन ड्रिप सिचाई से 5 लीटर पानी लेता है, यह सिस्टम इसलिए इस फल में लागू किया गया है ताकि कम से कम पानी को प्रयोग में लिया जाए।

Posted By: Jagran

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