बहादुरगढ़, जेएनएन। शिक्षा के महत्‍व की बातें तो सभी करते हैं, मगर सही मायने में इसे समझने वाले कुछ ही लोग होते हैं। ये न केवल समझते हैं बल्कि शिक्षा का दीपक भी जलाते हैं, जो हमेशाा जलता ही रहता है। बहादुरगढ़ के कुछ युवाओं की मुहिम अशिक्षा के अंधेरे में डूबे बचपन को शिक्षा के उजियारे की ओर खींच रही है। स्कूल की शक्ल न देख पाने वाले बच्चे इस मुहिम का हिस्सा बनकर अक्षर ज्ञान भी सीख रहे हैं और नैतिक मूल्यों का पाठ भी पढ़ रहे हैं। शिक्षा का जो अधिकार सबके लिए है, उसी को असहाय और मजबूर बच्चाें तक पहुंचाने के लिए चल रही यह मुहिम अब पांचवें साल के पड़ाव पर पहुंच चुकी है। नतीजा यह है कि काफी ऐसे बच्चे जो कल तक ड्राप आउट थे, अब स्कूल जा रहे हैं और पढ़-लिखकर कल के भारत के निर्माण में भागीदार बनने का ख्वाब संजोए हैं।

दरअसल, यह अभियान वर्ष 2015 में थैंक्स भारत ट्रस्ट के बैनर तले शुरू हुआ। बहादुरगढ़ के बैंक कालोनी के रहने वाले राहुल आर्य और उनके सर्कल के युवाओं ने ऐसे बच्चों को शिक्षा दिलाने की ठानी जो मलिन बस्तियों, झुग्गी झोपड़ियाें से आते हैं और स्कूल नहीं जा पा रहे। ऐसे बच्चों के लिए ट्रस्ट ऑफिस पर ही कक्षा शुरू की गई। पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाई गई। अब एक समय में 40 से 50 बच्चों को ट्रस्ट से जुड़े युवा पढ़ाते हैं। खास बात तो यह है कि बच्चों को नैतिक मूल्य भी सिखाए जा रहे हैं। ऐसे में शैक्षिक विकास के साथ-साथ ये बच्चे चरित्र निर्माण के सांचे में भी ढल रहे हैं। अब तक 50 से ज्यादा जो बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे थे उनका भी ट्रस्ट ने स्कूलों में दाखिला करवाया है। जो बच्चे स्कूल जाते हैं, उनकी अतिरिक्त पढ़ाई करवाते हैं।

विदेशों तक बांट रहे नैतिक शिक्षा का ज्ञान

इस मुहिम के अगुवा बने राहुल आर्य समाज से जुड़े हैं। महर्षि दयानंद के विचारों से प्रेरित होकर यह मुहिम शुरू की गई। राहुल ने विदेशी धरा तक नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया है। साेशल मीडिया के जरिये उन्होंने लाखों लोगों को इस मुहिम से जोड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी नैतिक शिक्षा का प्रचार किया है। लॉकडाउन से पहले वे 20 दिन के लिए युरोप में भी गए थे। इस मुहिम से प्रेेरित होकर ऐसी ही कई कक्षाएं देश के कई हिस्सें में जवानों ने शुरू की हैं। ट्रस्ट से जुड़े राहुल आर्य के अलावा ओमवीर आर्य, मनीष वैदिक, मिलन सैनी व अमित का कहना है कि नैतिक शिक्षा मनुष्य के लिए सबसे जरूरी है। नैतिकता के बिना कोई भी नौजवान निजी उन्नति तो भले ही कर ले, मगर परिवार, समाज और देश की उन्नति में सहायक नहीं हो सकता।

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