जागरण संवाददाता, हिसार : पुरुष एवं महिला इनफर्टिलिटी पर डायबिटीज के प्रभाव के बारे में अपने विचारों को साझा करते हुए नोवा फर्टिलिटी के चिकित्सा निदेशक, डा. मनीष बैंकर ने कहा कि डायबिटीज की समस्या तेजी से बढ़ रही है और दुनिया भर के 49 प्रतिशत मामले भारत में हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक इसके मामलों में दोगुना वृद्धि होने का अनुमान है। आज यह बीमारी स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है और यह कई कारकों के गौड़ परिणाम के रूप में आती है, जैसे- असक्रिय जीवनशैली, अनुपयुक्त आहार और तनावपूर्ण कार्य शेड्यूल। अध्ययनों के अनुसार, 20-25 वर्ष की आयु के 2.6 प्रतिशत महिलाएं और 3.7 प्रतिशत पुरूष में ब्लड ग्लूकोज की मात्रा अधिक या अत्यधिक उच्च स्तर की है। डायबिटीज के चलते अंग या उत्तक को नुकसान पहुंच सकता है, जिसका पुरुषों व महिलाओं की फर्टिलिटी क्षमता पर महत्वपूर्ण रूप से प्रभाव पड़ सकता है। पुरुषों में डायबिटीज के चलते निम्न कामेच्छा और इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या भी हो सकती है। महिलाओं में, डायबिटीज का संबंध हॉर्मोनल इंबेलेंस डिसऑर्डर से जुड़ा हो सकता है, जिसे पोलिसिस्टिक ओवेरियन ¨सड्रोम कहा जाता है, जिससे शरीर का वजन बढ़ जाता है और इससे प्राकृतिक गर्भधारण में समस्या जैसी कई अन्य जटिलताएं बढ़ जाती हैं।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021