संवाद सहयोगी, हिसार :

निजी परमिटों को हायर करने के विरोध में रोडवेज यूनियन और सरकार के बीच टकराव इस कदर बढ़ चुकी है कि पिछले 19 दिन से चल रही रोडवेज हड़ताल से आमजन तो परेशान है ही, अपितु सरकार को भी तीन करोड़ 70 लाख रुपये की चपत लग चुकी है। 16 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक तो रोडवेज के पहिए पूरी तरह से बंद रहे, जिस कारण 12 दिन पूरी तरह से रोडवेज के पहिए थमने से सरकार को 2 करोड़ 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। लेकिन 29 अक्टूबर के बाद प्राइवेट बसों को ऑन ड्यूटी लगाना व कच्चे कर्मचारियों की मदद से सरकार को 56 लाख रुपये की इनकम प्राप्त हुई। जोकि उम्मीद से काफी कम इनकम रोडवेज को हुई, जबकि रोडवेज की एक दिन की इनकम की बात करें तो 20 लाख रुपये है। लेकिन सरकार और रोडवेज यूनियन की टकराव इतना बढ़ गया कि रोडवेज को तीन करोड़ 80 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि हाईकोर्ट ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए रोडवेज यूनियनों की दलीलें सुन चुकी है, जिनमें कोर्ट से स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि प्राथमिकता आमजन के लिए सुविधा है। इसी मद्देनजर, रोडवेज यूनियन हड़ताल को खत्म करें। शाम 8 बजे तक भी नहीं बनी सहमति

कोर्ट की हिदायतों के बाद रोडवेज यूनियन नेताओं ने गुप्त स्थान पर मी¨टग रखी, जिसमें खास बड़े नेता ही इस मी¨टग में शामिल हुए। शुक्रवार शाम साढ़े बजे रोडवेज यूनियन के नेताओं ने मी¨टग शुरु की। लेकिन शाम आठ बजे तक भी हड़ताल को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। हड़ताल के दौरान 10 कर्मचारी ड्यूटी पर लौटे

हाईकोर्ट ने जैसे ही इस मामले में हस्तक्षेप किया तो रोडवेज के मैनेजमेंट के 10 सदस्य ड्यूटी पर लौट आए। दोपहर दो बजे से पहले ही ये कर्मचारी ने ड्यूटी ज्वाइ¨नग के लिए कार्यालय पहुंच गए। उम्मीद है कि सुबह रोडवेज कर्मचारी ड्यूटी पर लौट आएंगे। हालांकि अनुबंधित आधार पर लिए कर्मचारियों को लेकर अभी संशय है। चंडीगढ़ के आदेशानुसार आगामी कार्रवाई कर दी जाएगी।

- एएस मान, अतिरिक्त उपायुक्त

Posted By: Jagran

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