प्रियंका दुबे मेहता, गुरुग्राम :

कोरोना संक्रमण के चलते होम आइसोलेशन के इस माहौल में बच्चों की दुनिया जहां सोशल मीडिया, डिजिटल गेम और टेलिविजन की परिधियों में सिमट गई है, वहीं कुछ बच्चे इसका सदुपयोग करने के लिए कलात्मकता व रचनात्मकता से जुड़ने का संदेश दे रहे हैं। छठी कक्षा के विद्यार्थी व्योम भी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। वे इन दिनों ऐसी कृतियों को कागज पर उतार रहे हैं, जिन्हें पौराणिक समय से मेडिटेशन के लिए उपयोग में लाया जाता था। वे मंडाला कला से जुड़े चित्र बना रहे हैं।

व्योम की मां भावना का कहना है कि उन्हें बच्चे को केवल कागज और पेंसिल थमा दी और कहा कि डिजिटल मीडिया के आभासी भंवरजाल से निकल कर कुछ वास्तविक करें। ऐसे में व्योम ने इस कृति को बनाकर मां को दिखाया, तो वे चौंक गईं। उन्होंने उसे और बेहतर करने की प्रेरणा दी। किताबों में देखकर जागा कला के प्रति आकर्षण

जबरन हाथ में पेंसिल पकड़ा दी जाए, तो बच्चे बमुश्किल डॉरीमॉन, मिकी या मिनी जैसे कार्टून कैरेक्टर की रेखाएं खींचकर रह जाते हैं, लेकिन व्योम के साथ ऐसा नहीं हुआ। व्योम कविताओं का शौक भी रखते हैं। ऐसे में वे किताबें पलटते रहते हैं। इसी क्रम में उन्हें कुछ गोलाकार व ज्यामितीय कृतियां दिखीं। उन्हें लगा कि यह आम चित्रों से हटकर है। उन्होंने कागज पर इसे उकेरना शुरू किया और वह खूबसूरत मंडाला आर्ट का पीस बनकर तैयार हो गया। सेक्टर पचास स्थित मेफील्ड गार्डन निवासी व्योम की मां भावना माहेश्वरी के मुताबिक घर पर भी इस समय हर कोई व्यस्त है और ऐसे में बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहा है। यही सबसे उपयुक्त समय है, जब बच्चों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जा सकता है।

Posted By: Jagran

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