जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : व्यवसायी विनोद शर्मा की आत्महत्या मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग विनोद की पत्नी मीनू शर्मा ने की है। उनका कहना हैं कि अब तक जो भी एजेंसी जांच में लगाई गई है वो सब आरोपितों को बचाने में लगी है। सीबीआइ से जांच कराने की मांग वे शुरू से कर रही हैं मगर प्रदेश सरकार भी नहीं सुन रही है। मीनू ने मंगलवार को मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बताई।

शमां रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मीनू शर्मा ने बताया कि इस मामले को लेकर सिपाही से लेकर पुलिस आयुक्त तक और एसडीएम से लेकर मुख्य सचिव तक, यहां तक कि मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन अभी तक पुलिस नामजद आरोपी को भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। उनका कहना हैं कि आरोपियों को खुलेआम घूमते देखा जा रहा है। मीनू शर्मा ने इस मामले में एक तत्कालीन डीसीपी को बचाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सभी सबूत पुलिस और राज्य सरकार को दिए। इसके बावजूद भी कोई अधिकारी तत्कालीन डीसीपी को आरोपी मानने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने मामले की जांच एसआइटी को भले ही सौंप दी, लेकिन एसआइटी ने अभी तक नामजद आरोपी से पूछताछ नहीं की है। पुलिस वाले उल्टा उन्हें गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। व्यवसायी विनोद शर्मा ने दो जुलाई को खुद को गोली मार ली थी। उनकी एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान पांच जुलाई को मौत हो गई थी।

न्याय की लड़ाई में नहीं देख पा रही बच्चे का मुंह

मीनू शर्मा रोते हुए बताया कि उनका एक बेटा दिव्यांग है। वह खुद अपने हाथ से भोजन भी नहीं कर पाता। उनके पति के ¨जदा रहने तक वह उसे अपने हाथ से खाना खिलाती थी, लेकिन पति की मौत के बाद उनके लिए न्याय की लड़ाई में वह अपने बच्चे तक से दूर हो गई हैं। 20 दिनों से वह अपने बच्चे का चेहरा तक ठीक से नहीं देख पाई हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि उनके बेटे का पेट कैसे भर रहा है।

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