जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : पूरी दुनिया में जलभराव की वजह से जगहंसाई होने के बाद भी एक्सप्रेस-वे रखरखाव कंपनी मिलेनियम सिटी एक्सप्रेस-वे प्राइवेट लिमिटेड व जिला प्रशासन गंभीर होने को तैयार नहीं। एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ नालों की सफाई पर ध्यान नहीं। नतीजा हल्की बारिश होते ही सर्विस लेन पर पानी जमा हो जाता है। धीरे-धीरे पानी एक्सप्रेस-वे के ऊपर पहुंच जाता है। इस वजह से ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है।

पिछले महीने मूसलधार बारिश की वजह से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे स्थित हीरो होंडा चौक पर भारी जलभराव हो गया था। स्थिति यह बन गई थी कि अंडरपास में कई वाहन डूब गए थे। वाहनों को ढूंढने के लिए अधिकारियों को नाव का सहारा लेना पड़ा। अंडरपास में पानी इसलिए भर गया था क्योंकि आसपास के इलाकों की सीवर लाइनों से लेकर एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ नालों की सफाई के ऊपर ध्यान नहीं दिया गया था। हास्यास्पद स्थिति यह है कि अब भी न ही रखरखाव कंपनी और न ही जिला प्रशासन ही गंभीर दिख रहा है। राजीव चौक से लेकर खेड़कीदौला टोल की तरफ एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ नालों में गाद जमी है। यही नहीं झाड़सा चौक के नजदीक भी यही हाल है। इस वजह से हल्की बारिश होने पर भी सर्विस लेन पर पानी जमा हो जाता है। शनिवार शाम हल्की बारिश हुई थी लेकिन न केवल झाड़सा चौक के नजदीक बल्कि खांडसा अनाज मंडी के सामने, नर¨सहपुर के सामने, नाहरपुर रूपा के सामने सर्विस लेन पर पानी जमा हो गया था। इस वजह से ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई। कार्रवाई न होने से ध्यान नहीं दे रहे अधिकारी

जलभराव की वजह से जाम में फंसने वाले लोगों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ नालों की सफाई कराने की मुख्य जिम्मेदारी मिलेनियम सिटी एक्सप्रेस-वे प्राइवेट लिमिटेड (एमसीईपीएल) की है। कंपनी के बारे में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) से कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई असर नहीं। इसके बाद सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। उसमें भी कई बार शिकायत की जा चुकी है, कोई ध्यान देने को तैयार नहीं। जब मामला बिगड़ जाता है फिर सभी एक साथ लग जाते हैं। सेक्टर 10 निवासी राजकुमार यादव एवं हरवंश ¨सह कहते हैं कि नालों की सफाई के लिए जो भी अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अंडरपास में पानी भर गया, पूरी दुनिया में जगहंसाई हो गई फिर भी कोई असर नहीं। नालों की सफाई कराई जाती है। आसपास के लोग गंदगी डाल देते हैं। आसपास के लोगों को कई बार समझाया जा चुका है, इसके बाद भी मानने को तैयार नहीं। कहीं-कहीं पर मलबा तक डाल दिया जाता है। एमसीईपीएल से फिर कहा गया है कि वह बेहतर तरीके से सफाई कराए।

- एके शर्मा, निदेशक (प्रोजेक्ट), एनएचएआइ, गुरुग्राम

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