जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : कोरोना संकट से पहले तथा लॉकडाउन के दौरान नियमों को ताक पर रखकर कई तहसीलों में जमकर प्लाटों की रजिस्ट्री की गई। मुख्यमंत्री ने इस मामले में संज्ञान लिया। रजिस्ट्री करने पर पाबंदी लगा अब मुख्यमंत्री का उड़नदस्ता इस दौरान की गई रजिस्ट्री का रिकॉर्ड खंगालने में जुट गया है। सोमवार को फतेहाबाद सहित अन्य जिलों की कई तहसीलों में मुख्यमंत्री के उड़न दस्ते ने छापेमारी की तो गुरुग्राम के तहसील कर्मियों के चेहरों की हवाइयां उड़ने लगी। कई तहसीलदार से लेकर रजिस्ट्री मामले में जुड़े कर्मी चितित नजर आ रहे थे। हालांकि वे खुलेआम यह भी कहते दिख रहे हैं कि कोई भी रजिस्ट्री नियम विरुद्ध नहीं की गई है।

लॉकडाउन के दौरान कुछ समय बाद सरकार का राजस्व बढ़ाने के लिए रजिस्ट्री खोल दी गई थी। रजिस्ट्री खोलने के सरकार के इस फरमान का कई तहसीलदारों ने जमकर फायदा उठाया। अवैध कॉलोनी नहीं विकसित होने देने के लिए सरकार ने टुकड़ों में रजिस्ट्री पर पहले से ही पाबंदी लगा रखी है। कई तहसील व उप तहसील में सरकार के रजिस्ट्री खोले जाने के आदेश का फायदा उठाकर अवैध कॉलोनी में काटे गए प्लाटों की भी जमकर रजिस्ट्री की गई। कई अवैध कॉलोनी काटने वाले कॉलोनाइजर ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

20 अप्रैल से 4 मई के बीच की गई रजिस्ट्री की आरटीआइ के माध्यम से आरटीआइ कार्यकर्ता रमेश कुमार ने जानकारी मांगी। आरटीआइ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई जानकारी में उपायुक्त ने भी माना कि हरियाणा शहरी विकास अधिनियम की धारा 7 ए में आने वाले क्षेत्रों में बिना एनओसी के रजिस्ट्री की गई। आरटीआइ के माध्यम से मिली जानकारी में सोहना तहसील में 70, बादशाहपुर उप तहसील में 30, वजीराबाद तहसील में दो, कादीपुर उप तहसील में 10, हरसरू उप तहसील में 11 रजिस्ट्री की गई। इस दौरान की गई रजिस्ट्रियों में शहरी विकास प्राधिकरण अधिनियम की धारा 7 ए का उल्लंघन किया गया।

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