यशलोक सिंह, गुरुग्राम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साझे बयान में 'टोटलाइजेशन एग्रीमेंट' का जिक्र आने के बाद से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आइटी) सेक्टर में काफी उत्साह देखा जा रहा है। इससे उम्मीद बंधी है कि दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के बीच जल्द ही यह विशेष समझौता परवान चढ़ेगा। यदि ऐसा होता है तो अमेरिका में काम कर रहे तीन लाख से अधिक आइटी पेशेवरों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अभाव में इन पेशेवरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। हालांकि इस प्रकार का समझौता भारत ने यूरोप के कुछ देशों से पहले ही कर रखा है। सिर्फ अमेरिका से ही समझौता अभी तक नहीं हो पाया है। टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की काफी पुरानी मांग है।

भारतीय टेक्नोलॉजी पेशेवर हर साल अमेरिका के सोशल सिक्योरिटी फंड में लाखों डॉलर जमा करते हैं। जब वह अपने देश लौटते हैं तो उन्हें इस राशि का त्वरित भुगतान नहीं हो पाता है। बता दें कि अमेरिका का सोशल सिक्योरिटी फंड भारत के प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) की तरह ही है, जिसमें पेशेवरों के वेतन का एक निर्धारित हिस्सा इस फंड में जमा किए जाते हैं। आइटी सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि इस राशि का भुगतान भारतीय पेशेवरों को रिटायरमेंट की उम्र से पहले तभी किया जा सकता है जब अमेरिका के साथ टोटलाइजेशन समझौता हो। बराक ओबामा जब अमेरिका के राष्ट्रपति थे तब भारत ने इस समझौते का एक ड्राफ्ट तैयार कर अमेरिकी प्रशासन के समक्ष पेश किया था। जिस पर अमेरिका ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। वहां के प्रशासन का सीधा सा जवाब था कि दोनों देशों के सोशल सिक्योरिटी प्रावधानों में अंतर है।

भारत का इस प्रकार से समझौता यूरोप के कुछ देशों से पहले ही है। यही नहीं अमेरिका ने भी यूरोप के देशों के साथ इस प्रकार का समझौता किया हुआ है। गुरुग्राम स्थित आइटी कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष यह मुद्दा जिस प्रकार से उठाया है उससे लग रहा है कि आने वाले समय में इस दिशा में अच्छी प्रगति होगी। नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नेस्कॉम) ने भी प्रधानमंत्री को यह मुद्दा उठाने के लिए सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति के समक्ष जिस प्रकार से टोटलाइजेशन एग्रीमेंट का मुद्दा उठाया उससे अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आइटी पेशेवर काफी उत्साहित हैं। मैं कई साल तक अमेरिका में बतौर आइटी पेशेवर रहा हूं। मुझे सोशल सिक्योरिटी फंड में जमा अपनी राशि को निकलवाने के लिए भारी भरकम टैक्स चुकाना पड़ा। यदि यह एग्रीमेंट होता तो यह टैक्स नहीं चुकाना पड़ता।

सचिन गुप्ता, एक्सपर्ट, आइटी सेक्टर अमेरिका के सोशल सिक्योरिटी फंड में जमा राशि का भुगतान नौकरी से रिटायर या रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने के बाद होता है। जिन लोगों को यह राशि पहले निकालनी होती है उन्हें टैक्स चुकाना पड़ता है। यदि टोटलाइजेशन समझौता हो जाए तो इससे राहत मिल जाएगी। मैंने भी अमेरिका में 10 वर्ष तक नौकरी की है। मेरे वेतन से कटी राशि अभी भी वहां के सोशल सिक्योरिटी फंड में जमा है।

अजय चतुर्वेदी, सीईओ हर्वा

Posted By: Jagran

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