जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: गुरुग्राम कभी हॉकी में हरियाणा का बादशाह होता था यह वह दौर था जब हॉकी कोच फूल कुमार होते थे। लेकिन उनके रिटायर होने के बाद आज उसी हॉकी सेंटर पर खिलाड़ियों का टोटा है। इस सबके जिम्मेदार वे हॉकी कोच रहे, जिन्होंने फूल कुमार ¨सह के जाने के बाद काम करना जरूरी नहीं समझा।

अब प्रदेश में खेल महाकुंभ में भाग लेने के लिए गुरुग्राम में टीमों की भागेदारी कराना चुनौती बनी हुई है। हॉकी में ऐसे हालात हो रहे हैं यहां पर चार टीमें मिलना मुश्किल हो रहा है। नियम है कि चार टीमों के बीच जिला स्तर पर आपसी मुकाबले होने चाहिए। लेकिन यहां पर चार टीमों के लिए खिलाड़ी संख्या पूरी करना मुश्किल होगा। कहने के लिए यहां पर हॉकी एस्ट्रोटर्फ है लेकिन हालात यह है कि एक टीम किसी भी वर्ग की तैयार करना बड़ी चुनौती है।

पिछले 5-6 वर्ष से लगातार खेल विभाग के हॉकी कोचों की काम नहीं करने की शैली ने जिला की हॉकी को उस जगह पहुंचा दिया है जहां से अब दोबारा उठाना मुश्किल होगा। पिछले 5-6 वर्ष में यहां जो भी हॉकी कोच रहा है उसने काम न कर आराम किया। जिसका नुकसान यह रहा कि आज हॉकी टीम बनाने के लिए खिलाड़ी नहीं मिल रहे है। इस तरह के हालात के लिए जिला खेल अधिकारी से लेकर उच्च अधिकारी भी उतने ही जिम्मेदार है जिन्होंने हॉकी कोच के काम नहीं करना भी अनदेखी की।

दरअसल 26 सितंबर से प्रदेश के सभी जिला में जिला स्तर पर 25 खेलों के मुकाबले शुरू हो रहे हैं जो अलग अलग दिन खेले जाएंगे। जो 3 अक्टूबर तक चलेंगे। जिस के बाद 5 अक्टूबर से प्रदेश के अलग अलग जिले में राज्य स्तर मुकाबले शुरू होंगे और इस के लिए खेल विभाग ने तारीख व स्थान तय कर दिए है। इन खेलों में सब जूनियर व जूनियर और सीनियर स्तर तक खिलाड़ी भाग ले सकते हैं। सीनियर स्तर पर शामिल करने के लिए खेल विभाग ने ओलंपिक नियमों की पालना की गई है।

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