सुप्रीम कोर्ट ने की NCR में अवैध निर्माणों पर सख्ती, गुरुग्राम GMDA को नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में अवैध निर्माण और भूमि उपयोग उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने जीएमडीए सहित ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में अवैध निर्माण और भूमि उपयोग उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया है। फाइल फोटो
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाया।
जीएमडीए सहित एनसीआर प्राधिकरणों को नोटिस जारी।
कार्रवाई की जानकारी के लिए नए हलफनामे का निर्देश।
नया गुरुग्राम (गौरव सिंगला)। एनसीआर में अवैध निर्माण, भूमि उपयोग में अनधिकृत बदलाव और भवन नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने कहा कि जीएमडीए सहित संबंधित प्राधिकरणों को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई और अनुपालन की जानकारी अदालत को देनी होगी। केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को होगी।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने मामले में 20 मई को सुनवाई की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने जीएमडीए के अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण, गाजियाबाद नगर निगम और फरीदाबाद नगर निगम को भी नोटिस जारी किया।
कोर्ट ने कहा है कि ये सभी संस्थाएं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कार्यरत हैं और इन्हें मामले में चल रही कार्यवाही से अवगत कराया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि विभिन्न प्राधिकरणों की ओर से दाखिल हलफनामों में केवल सर्वेक्षण के परिणाम बताए गए हैं, लेकिन सर्वे के बाद की गई कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उपलब्ध रिकार्ड से यह संकेत मिलता है कि देशभर में भवन नियमों और भूमि उपयोग संबंधी उल्लंघनों का दायरा काफी बड़ा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित प्राधिकरणों को नए हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया।
इन हलफनामों में यह स्पष्ट बताया जाए कि सर्वेक्षण के बाद क्या कार्रवाई की गई, जैसे सीलिंग, तोड़फोड़ या कानून के तहत अन्य कदम। साथ ही हलफनामा संबंधित प्राधिकरण के प्रमुख अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत रूप से शपथ लेकर दाखिल किया जाए।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी भवन या भूखंड के लिए एक विशेष उपयोग की अनुमति ली गई है तो बाद में बिना मंजूरी उसके उपयोग में बदलाव नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने भवन नियमों और मास्टर प्लान के प्रविधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। अवैध निर्माण और भूमि उपयोग उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले अपीलीय एवं अर्ध-न्यायिक मंचों को भी लंबित मामलों का निपटारा यथासंभव तीन माह के भीतर करने का निर्देश दिया है।
