जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरमैन प्रवीण जैन का मानना है कि रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरअीएस) विकसित होते ही अलवर तक काफी तेजी से विकास होगा। इसका असर दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा के ऊपर होगा। रोजगार के नए-नए अवसर सामने आएंगे। किसी खास क्षेत्र में नहीं बल्कि एक साथ सभी क्षेत्रों में विकास की आंधी चलेगी। यह प्रोजेक्ट दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। जितनी जल्द हो प्रोजेक्ट के ऊपर काम शुरू होना चाहिए।

दैनिक जागरण से बातचीत में प्रवीण जैन ने कहा कि आरआरटीएस प्रोजेक्ट की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। इस प्रोजेक्ट से अलवर तक की तस्वीर बदल जाएगी। बहुत ही बेहतर तरीके से कागजी तौर पर काम किया गया है। अब आवश्यकता है जमीनी तौर पर काम शुरू करने की। किसी इलाके में विकास की गति तब तेज होती है जब सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बेहतर होती हैं। दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाले फिलहाल मानेसर से आगे रहना पसंद कम करते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि सड़कों के ऊपर ट्रैफिक का भारी दबाव। आरआरटीएस विकसित होने के बाद ट्रैफिक का दबाव न के बराबर रह जाएगा। इससे प्रदूषण की समस्या दूर हो जाएगी। आबादी का बोझ दिल्ली और आसपास नहीं बढ़ेगा। कारिडोर विकसित होने से पूरे इलाके में कारोबार बढ़ेगा। न केवल औद्योगिक विकास की गति तेज होगी बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी जबर्दस्त उछाल आएगा। इससे रोजगार के साधन बढ़ेंगे। जितनी जल्द हो प्रोजेक्ट की डीपीआर मंजूर कर जमीनी स्तर पर काम शुरू कराया जाए। हरियाणा के इलाके में काम शुरू करने से पहले के काफी कार्य हो चुके हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट के ऊपर सबसे पहले हरियाणा में ही काम शुरू किया जाए। बता दें कि प्रथम चरण के दौरान आरआरटीएस कारिडोर दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी (शाहजहांपुर-नीमराणा-बहरोड़) तक 106 किलोमीटर विकसित किया जाना है। दूसरे चरण में एसएनबी से लेकर सोतानाला तक और तीसरे चरण में अलवर तक कारिडोर बनाया जाएगा।

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