जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: अनलॉक-2 के दौरान औद्योगिक इकाइयों में कामकाज रफ्तार पकड़ने लगा है। जैसे-जैसे काम की गति बढ़ रही है वैसे-वैसे कामगारों को लेकर उद्यमियों की चिता भी बढ़ने लगी है। बड़ी वाहन निर्माता कंपनियों के लिए ऑटोमोबाइल कंपोनेंट बनाने वाली औद्योगिक इकाइयों का शेड्यूल बढ़ा है। ऐसे में उन्हें अब पहले से अधिक कामगारों की जरूरत है। जो उनके पास अभी उपलब्ध नहीं हैं। उद्यमियों द्वारा अपने गृह राज्य लौट चुके कर्मचारियों को बुलाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, मगर इसमें उन्हें अधिक सफलता नहीं मिल रही है। यदि इस माह के अंत यही स्थिति बनी रही तो दिक्कत बढ़ सकती है।

हरियाणा इंडस्ट्रीज के चेयरमैन ईश्वर सिंह का कहना है कि इस समय ऑटोमोबाइल कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों में कामगारों की भारी कमी है। धीरे-धीरे काम बढ़ता जा रहा है और काम करने वालों की संख्या कम पड़ रही है। अभी किसी न किसी प्रकार से काम चलाया जा रहा है। एक उद्यमी का कहना है कि कोविड-19 के मानक के अनुसार सीमित संख्या में कर्मचारियों से काम कराए जाने के कारण जो कर्मचारी गुरुग्राम में रह रहे थे वह भी अपने घरों को चले गए हैं। अब उन्हें बुलाने का प्रयास किया जा रहा है मगर वह आने में जल्दबाजी नहीं करना चाहते हैं।

चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ऑफ उद्योग विहार के अध्यक्ष अशोक कोहली का कहना है कि ऑटोमोबाइल सहित कुछ अन्य कंपनियों में काम करने वालों की कमी हो रही है। मौजूदा कर्मचारियों से आने वाले कुछ दिनों में काम कराना काफी मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यही सही समय है कि जब लोकल कामगार इस कमी को पूरा कर सकते हैं। निजी क्षेत्र में आरक्षण की पक्षधर सरकार इस दिशा में भी ध्यान दे। जिससे कि उद्यमियों को मानव संसाधन की कमी से परेशान नहीं होना पड़े। डीएम ऑटोमोटिव के डायरेक्टर दीपक मैनी का कहना है कि ऑटो सेक्टर की औद्योगिक इकाइयों में कामगारों की कमी आगे भारी पड़ने वाली है। इनका कहना है कि इनकी कंपनी में भी कर्मचारियों की कमी है।

Posted By: Jagran

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