जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : ¨प्रस हत्याकांड की बरसी शनिवार को बाल सुरक्षा दिवस के रूप में मनाई जाएगी। यह निर्णय परिजनों एवं हत्याकांड के बाद बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने को लेकर गठित एक संगठन ने लिया है। सेक्टर 44 स्थित एपी सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में लोग बच्चों की सुरक्षा को लेकर किस-किस स्तर पर प्रयास की आवश्यकता है, इस बारे में चर्चा करेंगे।

गत वर्ष आठ सितंबर को सोहना रोड स्थित एक निजी विद्यालय की दूसरी कक्षा के छात्र सात वर्षीय ¨प्रस की विद्यालय के ही बाथरूम में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। हत्या से 20 मिनट पहले ही उसके पिता उसे विद्यालय छोड़कर गए थे। उस घटना ने पूरे देश के लोगों को हिला दिया था। घटना के बाद ¨प्रस के पिता ने संकल्प लिया कि उनके बेटे की तरह किसी दूसरे के बच्चे की हत्या न हो, इसके लिए वह दिन रात संघर्ष करेंगे। इसी संकल्प के तहत उन्होंने दो मुख्य मांग शुरू की थी। इसमें से एक मामले की जांच सीबीआइ से कराने की थी। दूसरी मांग यह थी कि जिस विद्यालय में उनके बेटे की हत्या की गई, उसकी मान्यता रद की जाए। इसके पीछे उनका तर्क यह है कि जब तक सख्त निर्णय नहीं लिया जाएगा तब तक व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकती। उनके बेटे की हत्या करना इसलिए संभव हुआ क्योंकि विद्यालय में सुरक्षा के ऊपर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इसके अलावा भी कई अनियमितताएं थीं। सीबीएसई ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में यह साफ किया था कि विद्यालय में काफी अनियमितताएं हैं। इसके बाद भी मान्यता रद नहीं की गई। इसे देखते हुए ¨प्रस के पिता ने अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने सात सितंबर को विद्यालय प्रबंधन, प्रदेश सरकार एवं सीबीएसई को नोटिस जारी कर दिया। नोटिस के माध्यम से सभी से सवाल किया गया है कि क्यों न विद्यालय की मान्यता रद कर दी जाए। अगले छह सप्ताह के भीतर जवाब सभी को देने हैं। अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रहेगा

दैनिक जागरण से बातचीत में ¨प्रस के पिता ने कहा कि वह अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे। हत्याकांड के बाद उन्हें लगा कि अब उनका बेटा लौटकर नहीं आने वाला है। कुछ ऐसा करें जिससे कि दूसरा बच्चा उनके बेटे की तरह दुनिया से न जाए। इसे ध्यान में रखकर ही सीबीआइ जांच की मांग उठाई ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके। यदि सीबीआइ जांच नहीं होती तो बस सहायक अशोक आरोप से मुक्त नहीं होता। उम्मीद है जल्द ही मामले का ट्रायल शुरू होगा और फैसला आएगा। वह चाहते हैं कि आठ सितंबर को बाल सुरक्षा दिवस के रूप में मनाया जाए। बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर स्तर पर जागरूकता पैदा करना आवश्यक है। यह ठीक है कि ¨प्रस हत्याकांड के बाद लोग अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति काफी सजग हुए हैं लेकिन अभी इस दिशा में काफी कुछ करना बाकी है।

Posted By: Jagran