जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: साइबर सिटी व आसपास के क्षेत्र की हवा इन दिनों सामान्य से आठ गुना ज्यादा जहरीली है। सांस लेने में तकलीफ हो रही है। स्मॉग दम घोंट रहा है। हालात इतने खतरनाक हैं कि लोग घरों में कैद हो गए हैं। स्कूली बच्चों की छुंट्टी होने के साथ ही बच्चों का घर से बाहर पार्कों में भी निकलना बंद हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिले आंकड़ों के मुताबिक बृहस्पतिवार को गुरुग्राम में पीएम 2.5 का स्तर 412 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया, जोकि सामान्य से आठ गुना ज्यादा है।

बृहस्पतिवार को सुबह से शाम तक आसमान में स्मॉग फैला रहा और प्रदूषण व आंशिक रूप से बादल छाए रहने के कारण मौसम साफ नहीं हुआ। 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ऊपर एक्यूआइ (एयर क्वालिटी इंडेक्स) पहुंचने का अर्थ है कि हवा में जहरीली गैसों का स्तर बढ़ा हुआ है। हवा की कम रफ्तार होने के कारण स्मॉग छंट नहीं रहा है।

- कारगर साबित नहीं हो रहे उपाय

ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के पालन के लिए पेड़ों और सड़कों पर पानी का छिड़काव करने के साथ ही प्रदूषण फैलाने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। लेकिन हवा में फैल चुके कई गुना जहर को कम करने में ये उपाय कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं। निर्माणों पर प्रतिबंध के बावजूद निर्माण कार्य चल रहे हैं। सड़कों पर उड़ रही धूल प्रदूषण में और ज्यादा इजाफा कर रही है। इन कारणों से बढ़ रहा स्मॉग

तापमान में गिरावट के साथ ही जहरीली गैसें और धूल हवा में जमने लगी है। प्रदेश के धान उत्पादक जिलों में धान की कटाई के बाद फसल अवशेषों को जलाने से प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके अलावा खुले में कचरा जलाने, निर्माण सामग्री ढककर नहीं रखने और सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिग मशीन से सफाई नहीं करने से प्रदूषण बढ़ रहा है।

क्या है स्मॉग

स्मॉग शब्द स्मोक (धुआं) और फॉग (धुंध) से मिलकर बना है। तापमान में गिरावट और नमी बढ़ने के साथ ही हवा में मौजूद जहरीली गैसें कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड और हाइड्रो कार्बन के मोटे कण जमीन से थोड़ा ऊपर हवा में एक आवरण बना लेते हैं। देखने में यह धुंध जैसा लगता है।

जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचे 52 मरीज

खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके प्रदूषण से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने लगी है। आंखों में जलन, सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों के साथ 52 मरीज जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचे। खासतौर पर बुजुर्गो, नवजात शिशुओं और बच्चों को प्रदूषण से ज्यादा परेशानी हो रही है। चिकित्सकों ने प्रदूषण के दौरान घरों से बाहर कम निकलने और मास्क लगाने की सलाह दी है। इसके अलावा दिल व अस्थमा के मरीजों को एहतियात बरतने की जरूरत है।

Posted By: Jagran

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