गुरुग्राम (प्रियंका दुबे मेहता]। CBSE 10th Result 2020:  नाविक के धैर्य और कौशल की असल परीक्षा उस समय होती है जब धाराएं प्रतिकूल हों और वह अपनी कुशलता से नाव को मझधार से सुरक्षित निकाल लाए। विपरीत परिस्थितियों में इसी धैर्य का उदाहरण दिया है दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेक्टर 45 के विद्यार्थियों अधीप चौहान और कृति अग्रवाल ने। इन विद्यार्थियों ने शारीरिक दिव्यांगता के बावदू केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की दसवीं व बारहवीं कक्षा की परीक्षा में बेहतरीन अंक अर्जित कर सफलता पाई। इसी तरह से इसी स्कूल की छात्रा दामिनी ने आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद अच्छे अंक प्राप्त कर दिखा दिया कि संसाधनों के अभाव किस तरह कठिन परिश्रम सफलता दिलवा सकता है।

मेहनत और आत्मविश्वास से मिली कामयाबी

अपनी लगन, मेहनत और आत्मविश्वास के बूते अधीप चौहान ने 12वीं कक्षा में 90 फीसद अंक प्राप्त किए। उन्होंने लगातार पढ़ाई जारी रखी ताकि अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकें। वे मनोवैज्ञानिक बनने का लक्ष्य रखते हैं। उनका कहना है कि जंग में आधी जीत या हार मन पर निर्भर करती है। ऐसे में कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास कैसे रखा जाए, वे लोगों को बताना व सिखाना चाहते हैं। डिस्लेक्सिक होने के कारण उनकी पढ़ाई काफी प्रभावित हुई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और ब्रेक ले लेकर पढ़ाई जारी रखी। मां दीपिका चौहान और पिता रजनीश चौहान के अलावा छोटे भाई ने भी अधीप की पढ़ाई में बहुत मदद की है। अधिक खाली वक्त में पेंटिंग और जोगिंग करना पसंद करते हैं। पढ़ाई के दौरान बीच-बीच में बोरियत से बचने के लिए वे जोगिंग करते हैं।

शारीरिक व्याधि नहीं तोड़ पाई जज्बा

बारहवीं कक्षा में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली कृति चलफिर नहीं सकती। उन्हें जन्म से ही लोकोमोटर डिसएबिलिटी है। बावजूद इसके उन्होंने परीक्षा में अच्छे अंकों के साथ सफलता पाई। दसवीं कक्षा में 96.8 प्रतिशत और बारहवीं में 95.25 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। वे आगे की पढ़ाई इकोनॉमिक्स अॉनर्स में करके पॉलिसी मेकिंग विभाग में काम करना चाहती हैं ताकि वे समाज के उत्थान में योगदान दे सकें। मां टूना अग्रवाल और पिता असीम अग्रवाल की इकलौती बेटी कृति को संगीत और लेखन का शौक है। वे स्माइल फाउंडेशन के लिए ब्लॉग लेखन भी करती हैं। खाली समय में कमजोरों को पढ़ाती हैं। उन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर पर ड्यूक अफ इडनबर्ग का कांस्य और रजत पदक भी मिल चुका है।

संसाधनों के अभाव में भी पाई सफलता

प्रतिभावान विद्यार्थियों के साथ बैठकर पढ़ना, अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ न होना और उसके ऊपर से संसाधनों के अभाव में अच्छों अच्छों के हौंसले जवाब दे जाते हैं लेकिन स्कूल का रखरखाव करने वाले की बेटी दामिनी ने दसवीं की परीक्षा में 68.4 प्रतिशत अंक प्राप्त करके दिखा दिया है कि अगर लगन हो तो कोई भी चुनौती छोटी हो जाती है। पांचवीं कक्षा में दिल्ली पब्लिक स्कूल में दाखिला लेने के बाद दामिनी को लगा कि उनके लिए राहें बहुत मुश्किल है। अन्य विद्यार्थी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते और दामिनी की पकड़ इस भाषा पर नहीं थी। धीरे-धीरे उन्होंने अंग्रेजी सीखी और बाकी विद्यार्थियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने योग्य बनाया। सीबीएसई परीक्षा में उन्होंने परिस्थितियों के विपरीत होने के बाद भी बेहतर अंक प्राप्त किए। पिता दिनेशचंद और नीलम की बेटी दामिनी ने अपने अपने आत्मविश्वास के बूते कक्षा नौं में पहुंचते-पहुंचते वह प्रतिभा दिखाई की वे विद्यार्थी नेतृत्व टीम का हिस्सा बन गईं। आगे की पढ़ाई वे अर्थशास्त्र से कर रही हैं और आगे चलकर वे बाल मनोवैज्ञानिक बनना चाहती हैं। अपनी सफलता का श्रेय वे स्कूल प्राचार्य व शिक्षकों को देती हैं।

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