गुरुग्राम, जागरण संवाददाता। बहुचर्चित प्रिंस हत्याकांड मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजे बोर्ड) के फैसले के विरुद्ध बचाव पक्ष द्वारा सेशन कोर्ट में दी गई अर्जी को लेकर पीड़ित पक्ष की ओर से शुक्रवार को दलील पेश की गई। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल ने दलील पेश करते हुए कहा कि आरोपित भोलू को बालिग ही माना जाना चाहिए। वारदात के समय वह मानसिक रूप से स्वस्थ था। वह वारदात को अंजाम देने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम था।

सोची समझी साजिश के तहत वारदात को देता था अंजाम

जांच रिपोर्ट से साफ साबित होता है कि उसने सोची समझी साजिश के तहत वारदात को अंजाम दिया था। अंजाम देने से पहले तैयारी की थी। ऐसे में उसे बालिग के दायरे में रखकर जल्द से जल्द ट्रायल शुरू किया जाए। उसे आजीवन कारावास की सजा होनी चाहिए। इससे पहले सीबीआइ के अधिवक्ता ने भी अपनी दलील पेश करते हुए आरोपित को बालिग के दायरे में रखने की वकालत की। सभी पक्ष की दलील पूरी होने के बाद सेशन कोर्ट ने अपना फैसला आठ दिसंबर के लिए सुरक्षित रख लिया गया।

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि सोहना रोड स्थित एक नामी स्कूल के बाथरूम में आठ सितंबर 2017 को सात वर्षीय प्रिंस (अदालत द्वारा दिया गया नाम) की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। भाेलू (अदालत द्वारा दिया गया नाम) के ऊपर हत्या करने का आरोप है। पिछले महीने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपित को बालिग करार देते हुए मामले को सेशन कोर्ट में भेज दिया था। इस फैसले के विरुद्ध बचाव पक्ष ने सेशन कोर्ट मेें अर्जी डाल रखी है।

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Edited By: Abhi Malviya

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