गुरुग्राम, आदित्य राज। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के संस्थापक चीफ इंस्ट्रक्टर रहे लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) राज कादयान का मानना है कि 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुआ आतंकी हमला देश की आबरू पर हमला था। उस समय भी वैसी ही कार्रवाई की जानी चाहिए थी, जैसी पुलवामा हमले के जवाब में की गई। जिस तरह से सीमा पार करके बालाकोट में एयर स्ट्राइक की गई, उससे देश का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा है। आतंकियों की जड़ें तक हिल गई हैं। पाकिस्तान का मनोबल टूटा है। दुनिया को संदेश गया कि भारत केवल संयम की भाषा नहीं बोलता, आवश्यकता पड़ने पर मुंहतोड़ जवाब भी देना जानता है।गौरतलब है कि मुंबई हमले में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। 10 में से एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया था।

कादयान के मुताबिक, पकड़े गए आतंकी ने बताया था कि हमले की साजिश किस तरह से रची गई थी, किसने रची थी। उन्होंने मुंबई आतंकी हमला 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से कहीं ज्यादा बड़ा था। 1965 एवं 1971 की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) राज कादयान कारगिल युद्ध के दौरान स्ट्राइक कोर कमांडर की भूमिका में थे। काफी समय तक एनएसजी में ट्रेनिंग के इंचार्ज रहे।

मुंबई हमले की 13वीं बरसी की पूर्व संध्या पर दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुंबई आतंकी हमले से देश को डराने का प्रयास किया गया था। पाकिस्तान का सीधा हाथ था। कई बार मौके ऐसे आते हैं, जब बदला लेने पर कोई आलोचना नहीं करता। पूरी दुनिया आपका साथ देती है। मुंबई आतंकी हमला ऐसी ही मौकों में से एक था। ऐसे में पुलवामा आतंकी हमले का जवाब जिस तरीके से सीमा पार करके बालाकोट में एयर स्ट्राक के माध्यम से दिया गया, उसी तरीके से मुंबई हमले का जवाब दिया जाना चाहिए था। बालाकोट स्ट्राइक के बाद से देश का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा है। आतंकियों की जड़ें तक हिल गई हैं। पाकिस्तान का मनोबल टूटा है। दुनिया को यह संदेश गया कि भारत केवल संयम की भाषा नहीं बोलता, आवश्यकता पड़ने पर मुंहतोड़ जवाब भी देना जानता है।

एनएसजी का मुकाबला नहीं

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) राज कादयान कहते हैं कि एनएसजी का पूरी दुनिया में मुकाबला नहीं। जितने भी आपरेशन एनएसजी के द्वारा चलाए गए, सभी पूरी तरह सफल हुए। कम से कम समय में आपरेशन को पूरा करना इसकी खासियत है। अत्याधुनिक हथियारों से लैस इस बल के पास किसी भी स्थिति का मुंहतोड़ जवाब देने की क्षमता है। मुंबई आतंकी हमले के दौरान जिस तरीके से आपरेशन चलाया गया। उससे प्रमाणित हो गया कि इसका मुकाबला नहीं।

बता दें कि लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) राज कादयान कारगिल युद्ध के दौरान स्ट्राइक कोर कमांडर की भूमिका में थे। इससे पहले 1965 एवं 1971 की लड़ाई में भी भूमिका निभाई थी। काफी समय तक एनएसजी में ट्रेनिंग के इंचार्ज रहे। गुरुग्राम के लाल ने बढ़ाया था देश का मान मुंबई आतंकी हमले के दौरान आपरेशन का नेतृत्व मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के शहीद होने के बाद गुरुग्राम के लाल कैप्टन (अब कर्नल) अनिल जाखड़ ने संभाला था। आपरेशन चलाने के लिए एनएसजी की टीम मानेसर स्थित ट्रेन‍िंग सेंटर से रवाना हुई थी।

अनिल जाखड़ के पिता मेजर (रिटा.) ईश्वर सिंह जाखड़ बताते हैं कि हमले के 13 साल हो गए लेकिन आज भी पूरा मंजर आंखों के सामने है। बेटे ने देश का मान बढ़ाया था। आतंकियों के सभी मामलों की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करनी चाहिए। फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए। जितनी जल्द कार्रवाई होगी उतना ही अधिक उनके भीतर खौफ पैदा होगा।

Edited By: Aditya Raj