गुरुग्राम, जागरण संवाददाता। खेड़कीदौला टोल प्लाजा से सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये की वसूली की जाती है। इसके मुकाबले सुविधाएं नाकाफी हैं। 95 फीसद वाहनों में फास्टैग की सुविधा है, इसके बाद भी पीक आवर के दौरान दोनों तरफ सभी लेन में वाहनों की लाइनें लग जाती हैं। कैमरे फास्टैग तब रीड करते हैं जब वाहन नजदीक आ जाते हैं।

नजदीक आने के बाद भी कम से कम 15 से 20 सेकंड रीड करने में लग जाते हैं। वाहनों की हिसाब से लेनों की संख्या कम से कम 40 होनी चाहिए थी लेकिन केवल 25 है। सुविधाओं की कमी की वजह से प्रतिदिन पीक आवर के दौरान ही नहीं बल्कि बाकी समय भी ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है।

प्रतिदिन निकलते हैं 80 से 85 वाहन 

दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे के खेड़कीदौला टोल प्लाजा से प्रतिदिन औसतन 80 से 85 वाहन निकलते हैं। इन वाहनों से प्रतिदिन औसतन 55 लाख रुपये की वसूली होती है। इस हिसाब से हर महीने 16 करोड़ 50 लाख रुपये और सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये टोल के रूप में लोग देते हैं। इसके बाद भी उन्हें प्रतिदिन जाम को झेलना पड़ता है। सुविधाएं उपलब्ध कराने के ऊपर जोर नहीं। कुल मिलाकर कुछ सालों के दौरान एक्सप्रेस-वे के मुख्य मार्ग को बेहतर करने के अलावा अन्य विषय पर ध्यान ही नहीं दिया गया। सर्विस लेन में जगह-जगह गड्ढे हैं। मशीन से सफाई तक की सुविधा नहीं। हाथ से ही एक्सप्रेस-वे की सफाई की जाती है।

मुख्य मार्ग से लेकर सर्विस लेन पर कहीं भी साइकिल या बाइक चलाने वालों के लिए लेन बनाने पर ध्यान नहीं दिया गया। इसे देखते हुए हर क्षेत्र के लोगों की मांग है कि एक मार्च 2023 के बाद से टोल प्लाजा फ्री कर दिया जाए। एक मार्च को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) का एक्सप्रेस-वे रखरखाव कंपनी मिलेनियम सिटी एक्सप्रेस-वे प्राइवेट लिमिटेड के साथ एग्रीमेंट पूरा हो रहा है।

टोल के दायरे से बाहर वाले वाहनों की संख्या एक लाख से अधिक

खेड़कीदौला टोल प्लाजा से होकर प्रतिदिन औसतन एक लाख से अधिक ऐसे वाहन निकलते हैं जो टोल के दायरे में नहीं आते हैं। ऐसे वाहनों में बाइक, स्कूटी, साइकिल, आटो, ट्रैक्टर, रिक्शा और रेहड़ी आदि शामिल हैं। इन वाहनों के लिए टोल के दोनों तरफ केवल एक-एक लेन निर्धारित है। पीक आवर के दौरान इतना दबाव बढ़ जाता है कि 300 से 400 मीटर तक वाहनों की लाइन लग जाती है। इसका असर अन्य लेनों के ऊपर भी पड़ता है।

खेड़कीदौला टोल प्लाजा ने मानेसर औद्योगिक क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे गुरुग्राम में विकास की रफ्तार को धीमा कर दिया है। मानेसर की तरफ जाने के लिए और उधर से आने के लिए सोचना पड़ता है। टोल देने के बाद भी जाम का सामना करना पड़ता है। एक मार्च के बाद टोल प्लाजा पूरी तरह फ्री होना चाहिए।

- विनय गुप्ता, संरक्षक, दौलताबाद रोड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन

पिछले 10 साल से आइएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन टोल प्लाजा हटाने की मांग कर रही है। टोल प्लाजा की वजह से मानेसर औद्योगिक क्षेत्र की विकास की रफ्तार धीमी हो गई। बाहर से आने से पहले लोग दस बार सोचते हैं। एग्रीमेंट की सीमा खत्म होने के बाद टोल प्लाजा नहीं दिखना चाहिए।

- अतुल मुखी, अध्यक्ष, आइएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन

टोल प्लाजा हटाए जाने से लाखों लोगों को मानसिक पीड़ा से मुक्ति मिलेगी। पेट्रोल और डीजल की भारी बचत होगी। एक मार्च तक टोल संचालन कंपनी का एग्रीमेंट है। इसके बाद टोल वसूली हमेशा के लिए बंद होनी चाहिए। इससे विकास की गति तेज होगी।

-शेर सिंह चौहान, पूर्व सदस्य, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण

टोल प्लाजा हटते ही मानेसर और आसपास के इलाकों में विकास की आंधी चलेगी। टोल प्लाजा से विकास के ऊपर ग्रहण लगा हुआ है। एक मार्च के बाद टोल प्लाजा फ्री कर दिया जाए। टोल प्लाजा के दोनों तरफ रहने वाले लोग कई साल से जाम झेल रहे हैं।

- नरेंद्र यादव, अध्यक्ष, गुरुग्राम होम डेवलपर्स एसोसिएशन

Edited By: Abhi Malviya

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