आदित्य राज, गुरुग्राम

कोरोना संकट की मार एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों पर पड़नी शुरू हो गई है। जहां गुरुग्राम के विभिन्न इलाकों में रहने वाले श्रमिकों की घर वापसी तेज हो गई है वहीं दिल्ली में लाकडाउन के कारण वहां से उद्योग विहार इलाके में श्रमिक नहीं आ पा रहे हैं। नतीजा मंगलवार को औद्योगिक इकाइयों में 30 से 40 फीसद मैनपावर की कमी रही। इससे उद्यमियों की चिता बढ़ने लगी है।

उद्योग विहार इलाके की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले अधिकतर श्रमिक दिल्ली के कापसहेड़ा, सालापुर एवं रजोकरी इलाके में रहते हैं। खासकर गारमेंट इंडस्ट्री में काम करने वाले अधिकतर श्रमिक दिल्ली इलाके में रहते हैं। मंगलवार को किसी तरह से कुछ पुरुष श्रमिक पहुंचे लेकिन 80 फीसद से भी अधिक महिला श्रमिक नहीं आ पाईं। गारमेंट इंडस्ट्री में काफी संख्या में महिलाएं काम करती हैं। इससे जहां इलाके में हर तरफ ट्रैफिक का दबाव दिखाई देता था, वहीं मंगलवार को ऐसा लग रहा था जैसे गुरुग्राम में भी दिल्ली की तरह लाकडाउन लागू हो। इस स्थिति ने उद्यमियों की चिता बढ़ा दी है। चिता का एक बड़ा कारण श्रमिकों की घर वापसी भी है।

हजारों श्रमिक रवाना हो गए गृह प्रदेश

कोरोना संकट बढ़ने के साथ ही प्रवासी श्रमिकों का अपने गृह प्रदेश वापसी तेज हो गई है। डूंडाहेड़ा, मोलाहेड़ा, कार्टरपुरी, खांडसा, कासन, मानेसर, बास गांव आदि इलाकों में काफी संख्या में प्रवासी श्रमिक रहते हैं। उनमें से हजारों गृह प्रदेश के लिए रवाना हो चुके हैं। हजारों जाने की तैयारी कर रहे हैं। राजीव चौक, डूंडाहेड़ा, मानेसर, कासन सहित कई इलाकों से प्रतिदिन बसें बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान के लिए खुल रही हैं।

श्रमिकों को आशंका है कि जिस तरह से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है, वैसी स्थिति में कभी भी गुरुग्राम में लाकडाउन की घोषणा की जा सकती है। उद्यमियों से लेकर आम लोग उन्हें समझा रहे हैं कि लाकडाउन नहीं लागू होगा, लेकिन वे कुछ समझने को तैयार नहीं। बिहार वापस लौट रहे मंजय कुमार, सतीश एवं जितेंद्र का कहना है कि जिस तरह के हालात हैं उससे साफ है कि लाकडाउन लगेगा ही। पिछले वर्ष जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए वे लोग गृह प्रदेश जा रहे हैं। सबसे बड़ी चिता श्रमिकों की घर वापसी को लेकर है। वे कुछ समझने को तैयार नहीं है। जिस रफ्तार से श्रमिकों की घर वापसी शुरू हो गई है, वैसे में आशंका है कि कहीं पिछले साल जैसी स्थिति न पैदा हो जाए। औद्योगिक इकाइयां खुली रहेंगी लेकिन श्रमिक नहीं होंगे। दिल्ली में लाकडाउन की वजह से 30 से 40 फीसद श्रमिकों की कमी हो गई क्योंकि उद्योग विहार इलाके में काम करने वाले अधिकतर श्रमिक दिल्ली इलाके में रहते हैं।

- अनिमेष सक्सेना, अध्यक्ष, उद्योग विहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन कोरोना संकट को देखते हुए श्रमिकों के भीतर डर बैठ गया है कि अब लाकडाउन लगेगा ही। ऐसे में वे फिर से घर लौटने का मन बना चुके हैं। बहुत मुश्किल से सबकुछ पटरी पर आया था। फिर से पहले साल जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। यदि पहले साल जैसी स्थिति बन गई फिर भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अब जो श्रमिक लौट जाएंगे उनमें से अधिकतर शायद ही जल्द वापस आएंगे। सरकार ऐसी अपील करे जिससे कि श्रमिकों के भीतर से डर खत्म हो।

- अरविद राय, निदेशक, मोडलामा एक्सपोर्ट लिमिटेड

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