जागरण संवाददाता, गुरुग्राम :

शहर में नेत्र विशेषज्ञ व ऑल इंडिया ऑपथैल्मोलॉजी सोसाइटी (एआइओएस) की तरफ से आयोजित चार दिवसीय 78वी वार्षिक कांफ्रेंस का रविवार को समापन हो गया। कांफ्रेंस में भारत समेत 22 देशों के आई विशेषज्ञ शामिल हुए थे और आंखों की बीमारी के संबंध में जानकारी दी। हरियाणा ऑपथैल्मोलॉजी सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ.नरेंद्र कुमार तनेजा ने बताया कि कांफ्रेंस में बड़ी संख्या में डॉक्टरों को शामिल किया गया है। इसमें सभी विशेषज्ञों ने अपना-अपना अनुभव साझा किया।

उन्होंने कहा कि आज देश-दुनिया में आंखों की कई तरह की बीमारी पैदा होती है। अफ्रीका के कई देशों में आंखों की बीमारी पैदा होती है, तो भारत में अलग-अलग प्रदेशों में मौसम के साथ आंखों की बीमारी सामने आती है। कांफ्रेंस आयोजित करने का मकसद है कि आज जो तकनीक इलाज में प्रयोग की जा रही है, पांच साल बाद वह बदल जाएगी। हर समय नए इलाज की तकनीक आ रही है। उसको जानना जरूरी है। विदेशी डॉक्टरों ने बताया कि वह भारत में नया सीखने को बहुत मिलता है। बहुत देशों में एक ही तरह की बीमारी का सामना करना पड़ता है, लेकिन विशाल भारत में अलग-अलग मौसम और अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग बीमारी के मरीज मिलते हैं। डॉ. तनेजा ने कहा कि कांफ्रेंस में 10-10 लोगों के ग्रुप भी बनाकर डॉक्टरों में चर्चा कराई गई। इससे सभी डॉक्टरों को आपस में वार्ता करने में सुविधा रही। डॉ.तेनजा ने कहा कि कांफ्रेंस में दुनिया की वह कंपनी आई थी, जिनकी तकनीक ने आखों के ऑपरेशन को आसान बना दिया है और आज वह तकनीक हर मरीज तक पहुंचनी जरूरी है।

Posted By: Jagran

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