जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: अगर कोई युवा दूसरों से बात कम करता है और काम भी कम करता है, ज्यादातर खुद को अकेले रखता है तो 50 वर्ष की आयु के बाद उसे अल्जाइमर जैसी बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है। यह बीमारी युवाओं में नहीं के बराबर है। इसके होने पर मरीज की सोचने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है और पुरानी बातें भूलने लगाता है। कई बार ऐसा होता है कि अपना नाम भूल जाता है तो जिसके साथ रहता है या काम करता है, उसका नाम भी भूल जाता है। ऐसे लक्षण धीरे-धीरे बदलने लगते है। इसकी पहचान साथ रहने वाले साथी व परिवार के लोग जल्द कर सकते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि यह 60 वर्ष की आयु में ज्यादा होने लगता है। हालांकि, सामान्य तौर पर ध्यान देने से मरीज का इलाज किया जा सकता है।

नए शोध में आई चौंकाने वाली बात

एक नए शोध में चौंकाने वाली बात सामने आई है कि जहां पर वायु प्रदूषण की मात्रा ज्यादा है, वहां रहने वाले लोगों में अल्जाइमर और डिमेंशिया नामक बीमारी का खतरा अधिक है। ब्रिटेन की अल्जाइमर सोसायटी के वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों दावा किया था कि वायु प्रदूषण से ग्रस्त शहरों में अब ऐसे ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि भारत में एक करोड़ लोग अल्जाइमर बीमारी से ग्रस्त हैं। ऐसे लोगों को बातों में शामिल करें

परिवार व ऑफिस में अगर ऐसे सदस्य हैं तो उन्हें अलग-थलग नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें बातचीत में शामिल करना चाहिए। ऐसे लोगों से किसी-किसी मुद्दे पर बात करते रहना चाहिए। कई बार अल्जाइमर से ग्रस्त मरीज गुस्सा भी करने लगेगा, लेकिन ऐसे में उससे बात करना न छोड़ें। यह कोई ऐसी बीमारी नहीं है कि इसमें किसी की मौत हो जाए। इसमें भूलने की समस्या होती है। अगर इसकी पहचान कर ली जाए तो आराम से इलाज किया जा सकता है। पहले मरीज एक-दो महीने की बातें भूलता है, फिर पुरानी बातें भूलने लगता है।

डॉ. ब्रहमदीप सिधू, मनोरोग विशेषज्ञ

Posted By: Jagran

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