गुरुग्राम में खत्म होगी जलभराव की आफत, IIT गांधीनगर ने तैयार किया प्लान; सितंबर में आएगी सर्वे रिपोर्ट
आईआईटी गांधीनगर की टीम ने गुरुग्राम में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया। ...और पढ़ें

गुरुग्राम को जलभराव से निजात दिलाने के लिए आईआईटी गांधीनगर की टीम ने सर्वे किया। फोटो: आर्काइव
HighLights
आईआईटी टीम ने गुरुग्राम में जलभराव वाले स्थानों का निरीक्षण किया
भूमिगत स्टोरेज टैंक और इंजेक्शन वेल बनाने का सुझाव दिया
सितंबर में रिपोर्ट के आधार पर तय होंगे जलनिकासी के उपाय
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। गुरुग्राम में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए निरीक्षण करने आई IIT गांधीनगर की तकनीकी टीम एक दिन का दौरा पूरा कर लौट गई है।
टीम ने बुधवार को शहर के जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर मौजूदा जलनिकासी व्यवस्था, वर्षा जल के प्रवाह और पानी के संग्रहण की संभावनाओं का जायजा लिया।
अब IIT में तैयार होने वाली सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जलनिकासी के उपाय तय किए जाएंगे। अगले महीने यानी सितंबर में यह रिपोर्ट गुरुग्राम नगर निगम को मिल जाएगी।
बता दें कि IIT विशेषज्ञों ने बुधवार को नगर निगम और जीएमडीए अधिकारियों के साथ सेक्टर-46, सेक्टर-47 सहित जलभराव वाले क्षेत्रों का दौरा किया था।
सुभाष चौक, राजीव चौक समेत अन्य संवेदनशील स्थानों पर वर्षा जल को तेजी से निकालने और जमीन के भीतर पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विशेषज्ञों को शहर की जलनिकासी व्यवस्था और जलभराव की स्थिति की जानकारी दी।
भूमिगत टैंक में एकत्र होगा पानी
फिलहाल विशेषज्ञों की ओर से जलभराव वाले स्थानों पर उच्च क्षमता वाले भूमिगत स्टोरेज टैंक बनाने का सुझाव दिया गया है। वर्षा के दौरान सड़कों और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले पानी को पहले इन टैंकों में एकत्र किया जाएगा।
इसके बाद इंजेक्शन वेल (बोरवेल की तरह एक संरचना, जिससे तेजी से जमीन में पानी को पहुंचाया जाता है) के माध्यम से पानी को जमीन के भीतर पहुंचाया जाएगा। इससे जलभराव कम करने के साथ वर्षा जल का संचयन भी हो सकेगा।
एक इंजेक्शन वेल से हर सेकंड 48 से 80 लीटर तक वर्षा जल जमीन के भीतर पहुंचाने की क्षमता रखने का सुझाव है। इससे तेज वर्षा के दौरान कम समय में बड़ी मात्रा में पानी को सतह से हटाने में मदद मिल सकती है।
IIT की रिपोर्ट के बाद होगा अंतिम निर्णय
IIT टीम गुरुग्राम की भौगोलिक स्थिति, जलभराव की गंभीरता, वर्षा जल के प्रवाह और मौजूदा जलनिकासी व्यवस्था के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट IIT से नगर निगम गुरुग्राम को भेजी जाएगी।
इसके बाद विशेषज्ञों के सुझाव के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर स्टोरेज टैंक और इंजेक्शन वेल की क्षमता तथा संख्या तय की जाएगी।
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