गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाओ अभियान बंद, राजनीतिक दबाव में थमा निगम का बुलडोजर
गुरुग्राम में प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई के बाद राजनीतिक दबाव के चलते नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान रुक गया ...और पढ़ें
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गुरुग्राम में राजनीतिक दबाव के कारण रुका अवैध निर्माण पर बुलडोजर अभियान।
HighLights
राजनीतिक दबाव के चलते गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाओ अभियान रुका।
सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा समाप्त, निगम को देनी होगी रिपोर्ट।
अभियान रुकते ही गुरुग्राम में अवैध निर्माण और कब्जे बढ़े।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के विरुद्ध नगर निगम की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कुछ प्रभावशाली लोगों के निर्माणों पर कार्रवाई के बाद सत्ताधारी दल के एक स्थानीय नेता की शिकायत के चलते निगम का विशेष अभियान ठंडा पड़ने की चर्चा है।
बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद निगम के प्रवर्तन दस्ते ने अवैध निर्माणों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई रोक दी। इसके बाद बाजारों और प्रमुख सड़कों से अतिक्रमण हटाने का अभियान भी बंद कर दिया गया है।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से निगम प्रशासन को दिए गए चार सप्ताह की समयसीमा बुधवार को पूरी हो गई। अब निगम आयुक्त को 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में अदालत के समक्ष कार्रवाई की स्थिति और स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
ऐसे में अभियान का रुकना निगम अधिकारियों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। इस संबंध में नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया को पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।
प्रभावशाली निर्माणों पर कार्रवाई के बाद बढ़ा दबाव
सूत्रों के मुताबिक, प्रवर्तन दस्ते ने कुछ प्रभावशाली लोगों के व्यावसायिक निर्माणों और पक्के अतिक्रमणों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की थी।
कार्रवाई से नाराज एक स्थानीय नेता ने निगम अधिकारियों की शिकायत मुख्यालय स्तर पर की। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों को कार्रवाई रोकने के मौखिक निर्देश मिलने की बात सामने आ रही है। हालांकि निगम अधिकारी इस संबंध में खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं।
कार्रवाई रुकी तो फिर बढ़ने लगे कब्जे
अभियान थमते ही आयुध डिपो के प्रतिबंधित 900 मीटर क्षेत्र सहित नए और पुराने गुरुग्राम के निगम क्षेत्र में अवैध निर्माण हाेने लगे हैं। फुटपाथ और सरकारी जमीन पर कब्जे के साथ निर्माण भी किए जा रहे हैं।
