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गुरुग्राम में न जाने कितने 'युवराज', बिना पहचान दुनिया से हुए विदा; सवालों के घेरे में पुलिस

Published: Fri, 09 Oct 2026 04:44 PM (IST)

गुरुग्राम पुलिस लावारिस शवों के अंतिम संस्कार को लेकर सवालों के घेरे में है, खासकर युवराज सिंह मनचंदा के मामले ...और पढ़ें

मदनपुरी स्थित श्मशान स्थल। प्रतीकात्मक तस्वीर

मदनपुरी स्थित श्मशान स्थल। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. गुरुग्राम पुलिस लावारिस शवों के अंतिम संस्कार को लेकर सवालों के घेरे में।

  2. शहर में हर दूसरे दिन एक अज्ञात शव मिलता है, चिंताजनक स्थिति।

  3. विशेषज्ञों के अनुसार 80% शवों की पहचान बेहतर प्रयासों से संभव।

विनय त्रिवेदी, गुरुग्राम। दिल्ली के रियल एस्टेट एग्जीक्यूटिव युवराज सिंह मनचंदा के शव का लावारिस अवस्था में अंतिम संस्कार करने पर गुरुग्राम पुलिस सवालों के घेरे में है।

दिल्ली कोर्ट और हरियाणा डीजीपी तक ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। इस एक मामले ने गुरुग्राम में लावारिस शवों की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। क्या वाकई इन शवों की पहचान नहीं हो पाती, या पुलिस सही तरीके से पहचान की कोशिश ही नहीं करती।

तस्वीर चौंकाने वाली निकली

दैनिक जागरण ने जब लावारिस शवों के आंकड़े जुटाए तो तस्वीर चौंकाने वाली निकली। गुरुग्राम में हर दूसरे दिन एक अज्ञात शव मिलता है। एक महीने में इनकी संख्या 15 से 18 के बीच रहती है।

मदनपुरी स्थित श्मशान स्थल के रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल सितंबर तक ही 139 शवों का अंतिम संस्कार लावारिस स्थिति में किया जा चुका है। साल 2025 में यह संख्या 178 रही।

बिना पहचान अंतिम संस्कार

श्मशान प्रबंधन के मुताबिक, हर साल 180 से 220 लावारिस शवों को यहां अग्नि दी जा रही है। पिछले पांच साल में एक हजार से ज्यादा शवों का बिना पहचान अंतिम संस्कार हो चुका है।

जानकारी के अनुसार, सबसे ज्यादा अज्ञात शव रेलवे ट्रैक और सीमाई थाना क्षेत्रों बादशाहपुर, फरुखनगर, पटौदी, बिलासपुर, सेक्टर 65 में मिलते हैं। रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने या आत्महत्या के मामलों में शव कई बार क्षत-विक्षत हो जाते हैं, जिससे पहचान मुश्किल हो जाती है।

दूसरी बड़ी वजह गुरुग्राम की आबादी है। यहां उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल व अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रमिक वर्ग रहता है। कई अकेले रहते हैं, उनके परिवार का कोई संपर्क स्थानीय पुलिस के पास नहीं होता। ऐसे में उनकी पहचान नहीं हो पाती।

72 घंटे का नियम और 5000 रुपये का भुगतान

नियमानुसार अज्ञात शव मिलने पर पुलिस को 72 घंटे तक मोर्चरी में रखना होता है। इस दौरान जिपनेट, आसपास के थानों और गुमशुदगी रिपोर्ट से मिलान करना होता है। फोटो, पहचान चिन्ह, कपड़े सब अपलोड करने होते हैं। 72 घंटे बाद निगम द्वारा मदनपुरी श्मशान स्थल पर अंतिम संस्कार कराया जाता है। हर शव के संस्कार के लिए निगम 5000 रुपये देता है।

लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का काम देख रहे पारस गुप्ता के अनुसार, हर साल पांच से ज्यादा ऐसे मामले आते हैं, जब स्वजन पुलिस के साथ अस्थियां लेने पहुंचते हैं।

प्रबंधन अस्थियों को दो-तीन महीने तक सुरक्षित रखता है। जब गाड़ी भर अस्थियां इकट्ठा हो जाती हैं तो उन्हें हरिद्वार में प्रवाहित किया है। कई बार स्वजन बहुत देर से आते हैं।

80 प्रतिशत शवों की जाएगी पहचान

दिल्ली पुलिस से रिटायर्ड एसीपी अखिलेश यादव का कहना है कि अगर पहले 24 घंटे में ही फोटो जिपनेट, इंटरनेट मीडिया और सार्वजनिक जगहों पर लगाई जाएं तो 80 प्रतिशत शवों की पहचान हो सकती है। आजकल काफी ज्यादा सुविधाएं हैं। युवराज जैसे हाई-प्रोफाइल केस में जब यह हाल है तो आम लोगों के शव की पहचान की उम्मीद कैसे की जाए।