जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: इस बार दीपावली पर भी पटाखों से प्रतिबंध हटने की उम्मीद नहीं है। दीपावली में दस दिन से भी कम बचे हैं और अभी तक प्रशासन के पास पटाखों के संबंध में कोई आदेश नहीं पहुंचा है। ज्यादा शोर और प्रदूषण को देखते हुए दो साल पहले पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि गोदामों में ग्रीन पटाखे पहुंचना शुरू हो गए हैं, लेकिन इनको चेक करने के मानक क्या हैं, इसको लेकर अधिकारी भी उलझन में हैं। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर ग्रीन पटाखे चलाने पर जोर दिया गया था। जिले के फरुखनगर क्षेत्र और गाडौली में पटाखों के सात बड़े गोदाम हैं। इनमें से काफी जगहों पर ग्रीन पटाखे पहुंचना शुरू हो गए हैं।

- क्या हैं ग्रीन पटाखे

-ग्रीन पटाखों का फॉर्मूला राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने दिया था।

- इनसे सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण होता है।

- 40 से 50 फीसद तक कम हानिकारक गैस पैदा होती है।

- सामान्य पटाखों के जलाने से भारी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फर गैस निकलती है, ग्रीन पटाखों में गैसों के उत्सर्जन का स्तर कम होता है। पटाखों के लाइसेंस जारी करने के संबंध में फिलहाल कोई आदेश नहीं मिले हैं। हालांकि कई जगहों पर ग्रीन पटाखे मिलने की सूचना है, लेकिन इन पटाखों के लिए भी किसी तरह के स्पष्ट आदेश नहीं दिए गए हैं।

-ईशम सिंह कश्यप, सहायक मंडल अग्निशमन अधिकारी गुरुग्राम।

Posted By: Jagran

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