जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: किसान ट्रैक्टर रैली के नाम पर दिल्ली में हुए उपद्रव से लेकर जिला के लोग गुस्से में हैं। लोगों का कहना है कि किसान आंदोलन की आड़ में कुछ लोग देश को तोड़ने में लगे हुए हैं। वह मजबूत सरकार को हिलाने में लगे हुए हैं। दिल्ली स्थित लाल किले में उपद्रवी लोगों ने घुस कर तोड़फोड़ की, रोकने वाले पुलिसकर्मियों पर हमला किया। लोगों की मांग है कि ऐसे लोगों तथा उन्हें भड़काने वाले किसान नेताओं व विपक्षी नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। देश की राजधानी दिल्ली में जिस तरह से गणतंत्र दिवस के मौके पर अन्नदाता की आड़ में उपद्रवियों ने हालात पैदा किए हैं, वे माफी के लायक नहीं है। सरकार ऐसे उपद्रवियों पर अधिक सख्ती दिखाए, ताकि भविष्य में इस तरह की हिमाकत कोई ना कर पाए। किसानों की आड़ में शरारती तत्वों ने देश का माहौल खराब करने का प्रयास किया है। अपने गणतंत्र पर संविधान की धज्जियां उड़ाई हैं।

- बोधराज सीकरी, उद्योग पति व वरिष्ठ भाजपा नेता मैंने पहले भी कहा था कि किसानों के कंधे से देश को कमजोर करने वाले लोग अपना हित साध रहे हैं। उनकी मंशा देश में दंगा कराने की है। दिल्ली में जो हुआ, यह सुनियोजित रूप से किया गया। एक तरफ लोकतंत्र का पर्व मनाया जा रहा था तो दूसरी तरफ सड़कों पर उपद्रव किया जा रहा था। लाल किले के प्राचीर से दूसरा झंडा लहराया गया। मैं भी किसान यूनियन का संस्थापक सदस्य हूं। कई आंदोलन किए पर उत्पात नहीं किया। मेरा मानना है कि किसान आंदोलन ही नहीं होना चाहिए था। कुछ विपक्षी नेताओं की साजिश से आंदोलन खड़ा हुआ।

- रामऔतार, पूर्व सरपंच मानेसर व किसान यूनियन के संस्थापक सदस्य लाल किले की प्राचीर पर झंडा लगाकर देश की अस्मत से खिलवाड़ किया गया है। संविधान के अधिकारों से ही इतने दिनों तक लोग धरने पर बैठे हैं। सरकार ने पूरी छूट दी है। फिर भी सरकार के खिलाफ किसानों की आड़ में कुछ लोगों द्वारा अपने मंसूबों में कामयाब होने का प्रयास किया गया। ऐसे पवित्र दिन पर जब देश अपनी सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विरासत और अपने संविधान को नमन कर रहा था, उसी समय किसानों की आड़ में शरारती तत्वों ने जो माहौल पैदा किया, वह दुनिया में भारत को शर्मसार कर गया।

- लक्ष्मण पाहूजा, प्रधान आर्य केंद्रीय सभा, गुरुग्राम

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