जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: बच्चा चोर गिरोह के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अब सरगना के साथ ही खरीदारों की तलाश तेज कर दी गई है। बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले अधिकतर आरोपित गिरफ्त में आ चुके हैं। सरगना और खरीदारों की गिरफ्तारी से साफ होगा कि कुल कितने बच्चे चुराकर बेचे गए। अब तक मामले में कुल 11 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके पास से तीन बच्चे मिले हैं। तीनों बाल कल्याण समिति की देखरेख में हैं। पूछताछ से यह भी सामने आया है कि खरीदार भी सीधे सामने नहीं आते थे बल्कि अपने जानकारों को भेजते थे। ऐसे में अभी लगभग आठ से 10 आरोपित सामने आ सकते हैं।

पिछले महीने आठ जनवरी की रात बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश गांव नाथूपुर निवासी टैक्सी चालक उमेश लोहिया की समझदारी से हुआ था। जैसे ही उन्हें आभास हुआ कि उनकी टैक्सी में बच्चा चुराने वाले बैठे हैं। वह टैक्सी लेकर सीधे डीएलएफ फेज-तीन थाने में पहुंच गए थे। इसके बाद छानबीन तेज की गई तो पता चला कि दिल्ली-एनसीआर में गिरोह का नेटवर्क है। बच्चे चुराकर राजस्थान के अलवर ले जाए जाते हैं। वहीं पर खरीदार पहुंचते हैं। लड़के की कीमत चार से साढ़े चार लाख रुपये जबकि लड़की की कीमत एक से डेढ़ लाख रुपये लगाई जाती थी।

खरीदारों की गिरफ्तारी से साफ होगा कि वे आगे बच्चों को कहां ले जाकर बेचते थे। छानबीन से यह भी सामने आया है कि कुछ जरूरतमंद लोग पैसों के लिए अपने बच्चों को बेच देते हैं। 11 आरोपितों में एक बच्चे के माता-पिता भी शामिल हैं। हालांकि इन्हें बच्चे को बेचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया। एनसीआर से बाहर भी छापेमारी

गिरोह के सरगना और खरीदारों की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली-एनसीआर से बाहर भी छापेमारी की जा रही है। जहां भी वे छिप सकते हैं वहां पर कई बार पुलिस दबिश दे चुकी है। इससे साफ है कि कुछ आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद वे इलाके से फरार हो चुके हैं।

गिरोह का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। खरीदारों की गिरफ्तारी से ही साफ होगा कि अब तक कितने बच्चे बेचे गए। वे बच्चे कहां हैं। जल्द ही पूरा नेटवर्क ध्वस्त होगा।

-धर्मवीर सिंह, सहायक पुलिस आयुक्त, डीएलएफ

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