संवाद सहयोगी, बादशाहपुर: सरकार ने किसानों की फसल की प्राकृतिक आपदा से बर्बादी की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तो शुरू कर दी लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते अधिकतर किसान इस योजना के प्रति जागरूक नहीं हैं। कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान तो चलाते हैं, पर वह अभियान कागजों में ही सिमट कर रह जाते हैं। अधिकतर किसानों का कहना है कि उन्हें फसल बीमा योजना के बारे में जानकारी ही नहीं है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पहले किसानों के लिए बीमा कराने की अंतिम तारीख 15 दिसंबर तय की थी। बाद में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक ने सभी जिलों के कृषि उप निदेशकों को पत्र जारी कर 31 दिसंबर तक फसल का बीमा कराने के आदेश जारी कर दिए। फसल का बीमा कराने के लिए बीमा राशि गेहूं की 382 रुपये, जौ की 247 रुपये, सरसों की 233, चना की 180 रुपये, सूरजमुखी की 240 रुपये प्रति एकड़ तय कर रखी है। किसान को बीमित राशि का प्रीमियम डेढ़ फीसद देना है। इसके अलावा प्रीमियम का भुगतान केंद्र व राज्य सरकार बराबर अनुपात में करती हैं। किसानों को फसल बीमा योजना के बारे में जानकारी ही नहीं है।

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सरकार ने फसल बीमा योजना तो शुरू कर दी और किसानों के लिए अच्छी बात है, पर स्थानीय अधिकारी किसानों को इस तरह की योजनाओं के बारे में जानकारी ही नहीं देते हैं। इससे किसान योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं।

जगदीश फसल का बीमा होता है। हमें तो इस बारे में जानकारी ही नहीं है। बारिश की वजह से पूरी फसल बर्बाद हो गई। अगर बीमा कराने से इस तरह के नुकसान की भरपाई होती है। तो हम फसल का बीमा पहले ही करा लेते।

अमर सिंह सैनी किसान प्रकृति की मार से बुरी तरह प्रभावित होता है। बीमा योजना के बारे में कभी किसी अधिकारी ने या कृषि विभाग के कर्मचारी ने कोई जानकारी ही नहीं दी। बिना जानकारी के किसान कहां जा कर अपनी फसल का बीमा कराएं।

नरेश सैनी किसान अगर अपनी फसल का बीमा करा भी लेता है। तो बीमा अधिकारी नुकसान की भरपाई के लिए तरह-तरह के सवाल खड़े करते हैं। किसान को कुछ मिल भी नहीं पाता है और उसका तो दोहरा नुकसान हो जाता है।

सुजीत कुमार

Posted By: Jagran

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