जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: व्यवस्था में पारदर्शिता लाने एवं सेवाओं को त्वरित गति से लोगों तक पहुंचाने में डिजिटल प्लेटफार्म काफी कारगर साबित हो रहा है। बैं¨कग लेनदेन से लेकर कई प्रकार की सरकारी सेवाएं लोगों को ऑनलाइन प्राप्त होने लगी हैं। इंटरनेट, मोबाइल एवं वॉलेट बैं¨कग का दायरा काफी बढ़ गया है। पैन कार्ड, राशन कार्ड, बीमा, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर सहित अन्य कई चीजों को आधार कार्ड से ¨लक किया जा रहा है।

वहीं सोशल मीडिया एवं मोबाइल एप के जरिए भी लोगों की निजी जानकारियां रोजाना इधर-उधर हो रही हैं। उनकी इन जानकारियों का इस्तेमाल किस प्रकार से और कहां हो रहा है, यह उन्हें पता नहीं होता। इन्हीं कारणों से वह कई बार डिजिटल ठगी के शिकार हो जाते हैं। इसी वजह से साइबर विशेषज्ञ डिजिटल सिक्योरिटी विषय पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चलाने की सलाह दे रहे हैं।

सरकार को चाहिए कि वह इस प्रकार का अभियान शहर से लेकर गांव तक चलाएं। साइबर सिक्योरिटी को लेकर सिर्फ आइटी-आइटीइएस, बीपीओ, कॉरपोरेट एवं मल्टीनेशनल कंपनियों को ही सतर्क होने की जरूरत नहीं है। आम आदमी से लेकर हर स्तर के कारोबारी को भी इस मामले में जागरूक होने की जरूरत है। स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने की जरूरत है। आज मोबाइल में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले युवाओं द्वारा मनोरंजन व जानकारी के लिए कई प्रकार के एप का इस्तेमाल किया जाता है। इन एप के माध्यम से उनका डाटा कहीं न कहीं जमा होता रहता है। कई बार इनका दुरुपयोग हो जाता है। प्रदेश में आइटी-आइटीइएस कंपनियों का करीब ढाई सौ करोड़ रुपये का डाटा हर साल चोरी हो जाता है। साइबर सुरक्षा को लेकर हर स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। शहर से लेकर गांव तक में इस प्रकार का अभियान सरकार को चलाना चाहिए, जिससे वह ऑनलाइन सेवाओं का लाभ बिना गलती किए उठा सकें।

-अजय चतुर्वेदी, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ

युवाओं द्वारा मोबाइल बैं¨कग, इंटरनेट बैं¨कग सहित तमाम प्रकार के मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें से काफी लोग डिजिटल खतरों से वाकिफ नहीं है। सरकार को इसके लिए जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।

-यशदीप पंवार, कामकाजी युवा

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