जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को 10 प्रतिशत घरेलू सहायकों का पंजीकरण हर महीने करने का आदेश दिया है। राज्यों को असंगठित कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के तहत जनवरी 2019 से यह कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है, साथ ही 31 जनवरी 2019 तक ब्योरा जमा करने को कहा है।

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद साइबर सिटी में सक्रिय घरेलू सहायकों के संगठनों ने भी खुशी जताते हुए कहा कि यह फैसला देश के करीब 50 लाख घरेलू सहायकों के हक में जाएगा। घरेलू सहायकों के हक में आवाज उठाने वाली संस्था घरेलू कामगर यूनियन की संयोजिका माया जॉन ने बताया शहर की एक बड़ी आबादी घरेलू सहायकों पर ही निर्भर है। संगठन के आंकड़ों पर भी नजर डालें तो करीब 25 लाख की आबादी वाले शहर में पांच लाख से अधिक घरेलू सहायक काम कर रहे हैं, जिसमें तकरीबन 85 फीसद महिलाएं व युवतियां हैं। लेकिन यह असंगठित क्षेत्र अभी तक सामाजिक सुरक्षा कवर के दायरे में न आ पाने के चलते सामाजिक सुविधाओं से वंचित हैं। पुलिस के पास अस्सी हजार घरेलू सहायकों का ही ब्योरा है। अन्य बगैर पुलिस वैरीफिकेशन के रह रहे हैं।

नारी शक्ति संगठन की अध्यक्ष सुदिप्ती ने कहा कि प्रतिदिन घरेलू सहायकों से जुड़े कई मामले सामने आते हैं। ज्यादातर ऐसे मामले होते हैं जिसमें घरेलू सहायकों से वेतन के मुताबिक ज्यादा काम करवाने, बिना बताए नौकरी से निकालने जैसी गतिविधियां हैं। वहीं मालिकों की शिकायत रहती है कि सहायक बिना बताए छुट्टियां और बार-बार सैलरी बढ़ाने की मांग करते हैं। ऐसे में इन घरेलू सहायकों को पहचान पत्र और सामाजिक सुविधाओं का फायदा दिया जाना स्थिति में बदलाव लाएगा।

Posted By: Jagran