सत्येंद्र सिंह, गुरुग्राम

रविवार की शाम तक सब ठीक था। घरेलू सहायिका से लेकर स्कूल में कार्यरत कर्मचारियों ने भी नहीं सोचा था कि सुबह उन्हें डॉ.श्रीप्रकाश सिंह व उनके परिवार की मौत की खबर मिलेगी। दरअसल उन्हें इस बात आभास ही नहीं था कि घर के अंदर ऐसा माहौल है कि श्रीप्रकाश सिंह पत्नी व बच्चों की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर लेंगे।

हाईप्रोफाइल कॉलोनी उप्पल साउथएंड में हुई इस घटना के बाद पुलिस घरेलू कलह से लेकर आर्थिक तंगी व अन्य पहलू से जांच कर वास्तविकता तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। कोई बात तो जरूर थी जिसके चलते घर में कलह हुई होगी और श्रीप्रकाश सिंह ने पत्नी सोनू (कोमल) व बेटी-बेटा का बेरहमी से कत्ल करने के बाद अपने गले में फांसी का फंदा लगा जान दे दी। एक कर्मचारी ने यह जरूर कहा कि मालिक एक माह से तनाव में रहते थे। असली कारण तो आगे की जांच से ही सामने आएंगे पर गुरुग्राम में ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई। पहले भी घरेलू कलह के चलते कई लोगों ने पत्नी, बच्चों यहां तक कि माता-पिता को मौत के घाट उतारने के बाद जान दी है। मुझे लग रहा है, यह घटना शहरी लाइफस्टाइल की देन है। दोस्तों, परिवार व समाज के प्रेशर में लोग अपनी लाइफस्टाइल की बढ़ती डिमांड को पूरा करने में विफल होने लगते हैं और धीरे-धीरे यह दबाव कुंठा की तरफ धकेलता है। हम मान लेते हैं कि पॉश सोसायटी में रहने वाले लोग आर्थिक रूप से समृद्ध हैं और उन्हें कोई तंगी नहीं है। लेकिन लाइफस्टाइल को मेनटेन करने में कितनी जद्दोजहद होती है, वह कोई तीसरा व्यक्ति नहीं आंक सकता। दूसरा पहलू यह होता है कि किसी दूसरे शहर से गुरुग्राम जैसे शहर में फिट होने के लिए लोगों को बहुत जूझना होता है। बाजारवाद और भौतिकवादिता इंसान को खोखला कर जाती हैं।

- डॉ. गरिमा यादव, मनोवैज्ञानिक, द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय वैसे तो इस तरह की घटना मुख्य रूप डिप्रेशन की तरफ इशारा करती है, लेकिन घटना जिस क्रूरता से हुई है उसमें केवल डिप्रेशन वजह नहीं मानी जा सकती। इसके लिए आर्थिक तंगी जैसा मामला नहीं होगा। यह मनोरोग के केस में हो सकता है। आज के दौर में छोटी छोटी परेशानियों को लोग बड़े रूप में देखने लगते हैं। इसी का नतीजा है कि लोगों में हिसक प्रवृति पनपने लगती है।

- डॉ. आशीष कुमार, मनोचिकित्सक कोलंबिया एशिया

जिले में इस तरह की अन्य घटनाएं 11 जनवरी 2008 : बिलासपुर निवासी एक व्यक्ति ने दो बच्चों तथा पत्नी को मारने के बाद जान देने का प्रयास किया था। 10 सितंबर 2010 : कृष्णा कॉलोनी निवासी पूर्व फौजी देवेंद्र ने घरेलू कलह के चलते माता-पिता, पत्नी तथा छोटे भाई को गोली मार मौत के घाट उतारने के बाद आत्महत्या कर ली थी। 23 जुलाई 2009 : मूल रूप से बिहार के जिला सिवान निवासी रामकेश नामक युवक ने दो बच्चों व पत्नी को राजेंद्रा पार्क इलाके में सूखे कुएं में धकेल ऊपर से पत्थर मार हत्या कर खुद फांसी लगा जान दे दी थी। घटना की वजह घरेलू कलह सामने आई थी। 19 अप्रैल 2016 : सेक्टर 17 स्थित मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एमडीआइ) के लैब सहायक भरत डबास (41) ने अपने बच्चों अभिनव (10) अर्जुन (6) की हत्या करने के बाद खुद भी पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में पत्नी, उसकी बहन, माता-पिता व अन्य पर उक्त कदम उठाने के लिए मजबूर करने की बात लिखी थी। 1 जून 2016 : घरेलू कलह के चलते देवीलाल कॉलोनी में युवक अंसर (25) ने पत्नी कहकशां (22) की गला दबाकर हत्या करने के बाद खुद भी पंखे से लटककर जान दे दी थी। नौ महीने पहले ही दोनों की शादी हुई थी। कहकशां करीब सात महीने की गर्भवती थी। 30 अगस्त 2018 : पटौदी के बृजपुरा गांव में एक ही परिवार के चार लोगों का संदिग्ध अवस्था में शव बरामद किया है। परिवार का चौथे सदस्य एक साल की बच्ची की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हुई थी।

Posted By: Jagran

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